थलपति विजय की मूवी ‘Beast’ हुई कुवैत में बैन, बताई जा रही है यह वजह

थलपति विजय की मूवी ‘Beast’ हुई कुवैत में बैन, बताई जा रही है यह वजह

मनोरंजन, डेस्क रिपोर्ट। बात करें इंस्टाग्राम रील्स की या यू ट्यूब शॉर्ट्स की जहां भी देखो हर इंसान “मलम पिथा पिथा दे” (song malam pita pita de) गाने पर नाचता हुआ नजर आएगा। मूवी के रिलीज होने से पहले ही इस गाने ने चारों तरफ ऐसी धूम मचाई है कि हर कोई थिएटर में बैठकर इस गाने को देखने के इंतजार में है।

मशहूर साउथ इंडियन एक्टर थलपति विजय (Thalapathy Vijay) की नई मूवी बीस्ट (Beast Movie) का यह गाना जिसमें विजय के स्टेप ने लोगों को पागल कर रखा है जल्द ही सिनेमाघरों में आने वाली है। निर्देशक नेलसन दिलीपकुमार की यह फिल्म 13 अप्रैल को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी। पर ऐसे में एक देश ऐसा भी है जिसने फिल्म की रिलीज से पहले ही उसे बैन कर दिया है।

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जी हां बीस्ट मूवी को कुवैत सरकार के द्वारा बैन कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस फिल्म के दृश्यों में इस्लामिक टेररिज्म को दर्शाया गया है और जो कुवैत सरकार के हिसाब से उचित नहीं है। इसीलिए इस फिल्म को सरकार द्वारा बैन किया गया है। हालांकि यह पहली बार नहीं जब कुवैत में इन बिनाहों पर किसी फिल्म को बैन किया गया हो। कुरूप और f.i.r. फिल्म को भी सरकार द्वारा पहले बैन किया जा चुका है।

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फिल्म के ट्रेलर में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि यह फिल्म एक Hostage Thriller फिल्म है और इसमें कुछ आतंकी मॉल को हाईजैक कर लेते हैं। ऐसे में वीर राघव यानी विजय जो कि बाकी लोगों के साथ मॉल में कैद है और भारतीय सेना का एक जवान है कैसे उन आतंकियों को मारता है। ऐसे में कुवैत सरकार का इस फिल्म को बैन करना इस बात को दर्शाता है कि शायद सरकार को इस्लामिक टेररिज्म का यह एंगल भाया नहीं है।

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अक्सर ऐसा देखा गया है कि जिन भी फिल्मों में अरब देशों को आतंकियों के आश्रय के स्थान के रूप में दर्शाया जाता है अक्सर कुवैत सरकार द्वारा उन सभी फिल्मों को बैन कर दिया जाता है। ऐसे में देखना यह होगा कि कुवैत में रह रहे विजय के फैंस इस फिल्म को देखने के लिए अब क्या करेंगे? और कुवैत में फिल्म रिलीज ना होने की वजह से हो रहे नुकसान की भरपाई फिल्म के प्रड्यूसर कैसे पूरी करेंगे।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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