राजपाल यादव पिछले कुछ दिनों से चेक बाउंस मामले को लेकर सुर्खियों का हिस्सा बने हुए हैं। हालांकि इसी बीच उन्हें फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करते हुए देखा गया।
इस बीच अब दिल्ली हाई कोर्ट में एक्टर राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा राजपाल के खिलाफ इस कोर्ट को लेकर चल रही सजा को बरकरार रखा है। मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के साथ आर्थिक विवाद के मामले में चेक बाउंस होने के बाद एक्टर और उनकी पत्नी को सजा सुनाई थी। कोर्ट की ओर से कपल की 21 याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है। यह कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट या सेशन कोर्ट के निष्कर्ष में दखल देने का कोई कारण नहीं है। इस मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि कई सालों तक याचिकाकर्ताओं को बहुत रियायत दी गई है लेकिन वह अपने किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रहे।
वादा पूरा नहीं कर सके राजपाल
कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता के साथ मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की इच्छा जताने के बाद उनकी सजा पर रोक लगा दी गई थी लेकिन वह पैसों का इंतजाम करने के लिए अतिरिक्त समय मांगते चले गए। कोर्ट में बार-बार सनराइज स्थापित करते हुए सजा पर रोक जारी रखी। इसके बावजूद भी वह कोर्ट के सामने किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रहे। दोनों पक्ष किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं।
राजपाल ने चुना जेल जाना
हाई कोर्ट ने बताया है कि राजपाल यादव ने कोर्ट को यह जानकारी दी है कि वह शिकायतकर्ता को कोई रकम देने को तैयार नहीं है और पैसे लगाने की जगह पांच बार जेल जाना पसंद करेंगे। इस पर कोर्ट का कहना है कि कोई पक्षकार पैसे चुकाने की बजाय जेल जाने का विकल्प चुन सकता है। लेकिन ऐसा फैसला कानून से ऊपर नहीं हो सकता और ना ही कोर्ट के सामने रखे गए वादों को खत्म करता है। कोर्ट का कहना है कि अगर कोई बातों को मारने की जगह जेल जाने का रास्ता चुना चाहता है तो यह उसकी अपनी पसंद है।
ठुकराई गई अपील
इस मामले में हाई कोर्ट ने राजपाल यादव की प्रोबेशन आफ ऑफेंडर्स एक्ट के तहत रिहाई की अपील को भी ठुकरा दिया है। कोर्ट का कहना है कि उनका आचरण बिल्कुल भी ऐसा नहीं था कि उन्हें कानून के तहत मिलने वाली कोई विशेष रहा प्रदान की जाए।






