बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा और उनके पति जहीर इकबाल की आने वाली फिल्म ‘तू है मेरी किरण’ को लेकर पिछले कुछ दिनों से काफी चर्चा हो रही है। यह फिल्म शुक्रवार 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए बिल्कुल तैयार है। हालांकि सिनेमाघरों में आने से ठीक पहले इस फिल्म की रिलीज पर कानूनी अड़चनें आ गई थीं और बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाने की बात कही थी जिससे मेकर्स की मुश्किलें बढ़ गई थीं।

दरअसल बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में मेकर्स को तगड़ा झटका देते हुए एक बहुत बड़ी शर्त रख दी थी। अदालत ने साफ कहा था कि जब तक को-प्रोड्यूसर इकेलॉन प्रोडक्शंस 15 प्रतिशत ब्याज के साथ ₹8.85 करोड़ रुपये जमा नहीं कर देता तब तक यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज नहीं की जाएगी। इस कड़े आदेश के बाद फिल्म के मेकर्स के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी हालांकि बाद में तय शर्तों के मुताबिक रास्ता निकाला गया।

लीगल कॉन्ट्रैक्ट और पैसों के लेनदेन को लेकर हुआ था बड़ा विवाद

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार यह पूरा विवाद फिल्म के निर्माण के दौरान किए गए एक लीगल कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा हुआ है। ‘एंड मूवी प्रोडक्ट्स LLP’ नाम की कंपनी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक फिल्म को बनाने के लिए दोनों ही कंपनियों को शुरुआत में साढ़े सात करोड़ रुपये निवेश करने तय हुए थे लेकिन बाद में पैसों को लेकर खींचतान शुरू हो गई।

याचिकाकर्ता कंपनी ने अपनी बात रखते हुए कोर्ट को बताया कि उन्होंने मार्च 2024 से लेकर जनवरी 2025 के बीच फिल्म में कुल 8.85 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश किया था। डील के नियमों के अनुसार यह तय हुआ था कि फिल्म रिलीज होने से पहले उनके लगाए गए सारे पैसे वापस लौटा दिए जाएंगे। जब समय पर पैसे नहीं मिले तो कंपनी का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया।

बिना जानकारी दिए ओटीटी पर रिलीज की प्लानिंग बनाने का लगा आरोप

मामले की सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि को-प्रोडक्शन कंपनी को बिना बताए ही फिल्म की ओटीटी रिलीज की प्लानिंग अंदर ही अंदर तैयार की जा रही थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि उनकी अनुमति और जानकारी के बिना इस तरह के बड़े फैसले लिए जा रहे हैं जो पूरी तरह से गलत है।

अदालत ने जस्टिस अमित बोरकर की बेंच के जरिए 19 अक्टूबर को आर्बिट्रेशन एंड कंसीलिएशन एक्ट के सेक्शन 9 के तहत अपना यह अंतरिम आदेश सुनाया था। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि जब तक तय रकम ब्याज सहित जमा नहीं होती तब तक राहत मिलना मुश्किल है।