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सबसे ज्यादा गानों वाली पहली बॉलीवुड हिंदी फिल्म, आज तक कोई नहीं तोड़ सका ये रिकॉर्ड

Written by:Sanjucta Pandit
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गानों का इंडस्ट्री में अहम योगदान रहा है। गाने को लोग थेरेपी भी मानते हैं। इससे मानसिक तनाव दूर करने का एक जरिया भी माना जाता है। यही कारण है कि फिल्म की कहानी और कास्टिंग तय होने के बाद फिल्म में कर्ज सबसे पहले गानों पर बात करते हैं।

बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक से बढ़कर एक फिल्म लोगों के जीवन में अलग जगह बनाई है। यह सभी असल जिंदगी से प्रेरित होते हैं। कुछ लोगों को कॉमेडी फिल्में ज्यादा अच्छी लगती है, तो कुछ लोगों को हॉरर थ्रिलर फिल्म पसंद आती है। कुछ फिल्में ऐसी होती है, जो गाने की बदौलत हिट हो जाती है, तो कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो कहानी और करैक्टर की बदौलत हिट होती हैं। बॉलीवुड फिल्मों की कहानी में गानों को कुछ इस तरह जाता है कि यह दिल जोड़ने से लेकर टूटने तक की कहानी को बयां कर देते हैं। गानों का इंडस्ट्री में अहम योगदान रहा है। गाने को लोग थेरेपी भी मानते हैं। इससे मानसिक तनाव दूर करने का एक जरिया भी माना जाता है। यही कारण है कि फिल्म की कहानी और कास्टिंग तय होने के बाद फिल्म में कर्ज सबसे पहले गानों पर बात करते हैं।

इस दौरान यह तय किया जाता है कि कब कौन सा गाना आएगा, इसे कौन गाएगा, इस गाने को किस पर फिल्माया जाएगा, इस गाने की शूटिंग कहां की जाएगी, यह सब फिल्म की कहानी के अनुसार ही तय किए जाते हैं।

72 गाने

आज के आर्टिकल में हम आपको उस बॉलीवुड फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें दो नहीं, 5 नहीं, 10 नहीं, बल्कि कुल 72 गाने थे। यह फिल्म पूरे 3 घंटे 31 मिनट की थी। सबसे ज्यादा गानों वाली पहली हिंदी फिल्म साल 1932 में आई थी। जिसका नाम इंद्रसभा है। यह उस समय में रिलीज हुआ था, जब साउंड वाली फिल्मों का दौरा शुरू ही हुआ था। इस फिल्म के नाम से दो फिल्में बनी है। जिनमें से पहली फिल्म मणिलाल जोशी ने बनाई थी, जो कि 1925 में रिलीज हुई। यह एक साइलेंट फिल्म थी। वहीं, दूसरी फिल्म 1932 में रिलीज की गई, जिसमें 72 गाने थे। इनमें 9 ठुमरियां, 4 होली के गाने, 31 गजलें, 2 चौबोला, 5 छंद और 5 अन्य गाने शामिल थे।

यह थी स्टोरी

यह फिल्म पूरी तरह से राजा और प्रजा की प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म है। जिसमें राजा का स्वभाव दयालु और न्याय प्रिय रहता है, जो अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करता है। उनकी हर दुख को अपना समझता है। इसके अलावा, जहां लोगों को जरूरत रहती है वह उसकी मदद करने के लिए आगे आता है। उसकी करूणा और उदारता की कहानी स्वर्ग लोक तक पहुंच जाती है। ऐसे में इंद्रसभा की एक सुंदर अप्सरा राजा की परीक्षा लेने धरती पर आती है। परीक्षा लेते-लेते वह राजा के गुणों के कारण अपना दिल हार बैठती हैं।

नहीं टूटा रिकॉर्ड

इस फिल्म में जहानारा कज्जन और मास्टर निसार लीड रोल में नजर आए थे। बता दें कि जहानारा कज्जन को उस समय बंगाल की नाइटेंगल कहा जाता था, क्योंकि अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती थी। हालांकि, 30 साल की उम्र में ही वह दुनिया को अलविदा कह गई थी। वहीं, इस फिल्म का रिकॉर्ड आज तक कोई भी नहीं तोड़ पाया है।

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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