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ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार ने ठुकराई ‘प्यासा’, बन सकती थी करियर की सबसे बड़ी हिट

Written by:Sanjucta Pandit
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उन्होंने कई ऐसी फिल्मों को ठुकराया जो बाद में ब्लॉकबस्टर साबित हुईं। ऐसी ही एक फिल्म को साल 1957 में उन्होंने ठुकरा दिया था, जिसकी वजह फीस मानी जाती है।
ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार ने ठुकराई ‘प्यासा’, बन सकती थी करियर की सबसे बड़ी हिट

बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में दिलीप कुमार बहुत बड़ा नाम है, जिन्होंने अपने दम पर लोगों के दिलों में अलग पहचान बनाई थी। करियर के दौरान एक से बढ़कर एक शानदार फिल्में देने वाले एक्टर को इंडस्ट्री का पहला सुपरस्टार कहा जाता है। यह एक ऐसे अभिनेता थे जो एक समय पर केवल एक ही फिल्म में काम किया करते थे और अपना पूरा समय एक ही फिल्म को दिया करते थे।

हालांकि, उन्होंने कई ऐसी फिल्मों को ठुकराया जो बाद में ब्लॉकबस्टर साबित हुईं। ऐसी ही एक फिल्म को साल 1957 में उन्होंने ठुकरा दिया था, जिसकी वजह फीस मानी जाती है।

प्यासा फिल्म

दरअसल, इस फिल्म का नाम प्यासा है जो 1957 में रिलीज़ हुई थी, जिसमें वहीदा रहमान, माला सिन्हा और जॉनी वॉकर ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म में गुरुदत्त विजय लीड रोल में नजर आए थे, जबकि डायरेक्टर गुरु दत्त चाहते थे कि इस रोल के लिए सिर्फ ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार ही फिट बैठ सकते हैं। जब उन्होंने इसका ऑफर दिलीप साहब को दिया तो एक्टर को कहानी बहुत पसंद आई लेकिन उन्होंने डेढ़ लाख रुपए फीस की मांग की। लेकिन उस वक्त गुरु दत्त के लिए यह बहुत बड़ी रकम थी।

फीस बनी बाधा

फीस को लेकर बात नहीं बनने के कारण फिल्म में दिलीप कुमार नजर नहीं आए और यह फिल्म सिनेमाघरों में दस्तक देते ही सीधा दर्शकों के दिलों में उतर गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह फिल्म उस साल की हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म बनी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिलीप कुमार की कुल संपत्ति लगभग 627 करोड़ रुपये है। उनकी आय का मुख्य स्रोत अभिनय था। अभिनेता संसद सदस्य भी थे, जिससे उन्हें वेतन मिलता था।

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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