दक्षिण-पश्चिम मानसून के विदा होते ही मध्य प्रदेश का मौसम का मिजाज एकदम से बदल गया है। दिन में तेज धूप निकल रही है वहीं सुबह और रात में हल्की ठंडक का अहसास होने लगा है। साथ ही दिन-रात के तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि 2 दिन बाद पूर्वी हिस्से में बादल छाने के साथ बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है।

मौसम विज्ञान केंद्र, भोपाल के मुताबिक, 7 और 8 अक्टूबर को प्रदेश के पूर्वी हिस्से में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने का अनुमान है। इन दो दिनों में छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट जिले में बारिश के आसार हैं।

फिलहाल 5 और 6 अक्टूबर को मौसम साफ रहेगा और धूप खिली रहेगी। रविवार (4 अक्टूबर 2026) को रायसेन प्रदेश में सबसे गर्म रहा। यहां दिन का तापमान सामान्य से 37 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। फिलहाल प्रदेश के 15 जिलों में दिन का तापमान सामान्य से अधिक और 12 जिलों में सामान्य के आसपास चल रहा है।

मौसम विभाग की मानें तो दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की रेखा वर्तमान में सुपौल, रांची, रायपुर, ब्रह्मपुरी, परभणी, बारामती, हरनाई से होकर गुजर रही है। अगले 2-3 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून की महाराष्ट्र और विदर्भ के अधिकांश हिस्सों, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्सों, तथा तेलंगाना और उत्तर आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों से वापसी के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल होने की संभावना है। 0.9 किमी की ऊंचाई पर औसत समुद्र तल से ऊपर एक ट्रफ उत्तर-पूर्वी बिहार से लेकर उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी तक, झारखंड और गंगीय पश्चिम बंगाल से होकर गुजर रही है। इनके प्रभाव से संबंधित क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर मौसम में आंशिक बदलाव देखा जा सकता है।

इस मानसून सीजन में 35.8 इंच बारिश हुई, सामान्य से 4% कम

  • मध्य प्रदेश में मानसून का सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक होता है। इस बार पूरे सीजन में 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है,जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) होनी चाहिए थी। इस तरह पूरे सीजन में प्रदेश में करीब 4 फीसदी बारिश कम हुई।
  • चुंकी इस बार मानसून 24 जून को प्रदेश में एंटर हुआ था और 3 अक्टूबर को विदाई हुई है, इस हिसाब से प्रदेश में करीब 100 दिन मानसून सक्रिय रहा। पिछले साल मानसून ने 16 जून 2025 को प्रदेश में प्रवेश किया था और 13 अक्टूबर 2025 को विदा हुआ था।
  • इस बार पूर्वी मध्य प्रदेश में 4% ज्यादा पानी गिरा, लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 12% कम बारिश दर्ज की गई। इसी के चलते प्रदेश के 55 में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका हालांकि 25 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई।
  • इस सीजन में आलीराजपुर बारिश के मामले में सबसे पीछे रहा। निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से ज्यादा बारिश दर्ज हुई।
  • बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।
  • आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम पानी गिरा है।
  • भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडोरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।