
गुजरात में सूरत की पीपी सवानी यूनिवर्सिटी में एक आदिवासी छात्र और बीजेपी नेता के बेटे तनुज वसावा के साथ मारपीट और जातिवादी टिप्पणी का मामला सामने आया है। तनुज बीएससी (रसायन विज्ञान) द्वितीय वर्ष का छात्र है और उसे आदिवासी कोटे से यूनिवर्सिटी में दाखिला मिला था। उसकी शिकायत पर अंकलेश्वर जीआईडीसी पुलिस ने विश्वविद्यालय के 19 छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि सीनियर छात्रों ने न केवल उसकी पिटाई की, बल्कि उसकी एसयूवी से उसकी जाति दर्शाने वाली नेमप्लेट जबरन हटा दी और धमकाया। पुलिस ने बताया कि केस बीएनएस और एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम की धाराओं में दर्ज किया गया है।
तनुज के अनुसार, पहली घटना तब हुई जब सीनियर छात्रों ने उसकी कार के बोनट पर लगी “वसावा” नाम की नेमप्लेट हटाने को कहा। उसके इनकार करने पर छात्रों ने उसे धमकाया और मारपीट कर प्लेट हटा दी। कुछ छात्रों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया, लेकिन तनाव खत्म नहीं हुआ। तनुज का आरोप है कि इसके बाद आरोपी छात्रों ने छह कारों में उसका पीछा किया, उसे जबरन रोका और गाड़ी से बाहर निकालकर फिर से पिटाई की। किसी तरह वह वहां से भाग निकला और अंकलेश्वर जीआईडीसी पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
बीजेपी नेता के बेटे के साथ यूनिवर्सिटी में मारपीट
मामला यहीं नहीं थमा। सोमवार शाम ईएसआईसी अस्पताल के पास तनुज की पिटाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को जब तनुज यूनिवर्सिटी लौटा, तो आरोपी छात्रों ने उसे दोबारा घेर लिया और मजाक उड़ाते हुए धमकी दी कि पुलिस उनके खिलाफ कुछ नहीं कर पाएगी। इस रवैये से तनुज और आदिवासी समुदाय में गुस्सा फैल गया।
तनुज के पिता और बीजेपी नेता फतेह सिंह वसावा ने बताया कि उन्होंने बेटे को हमेशा पढ़ाई पर ध्यान देने और किसी विवाद से दूर रहने की हिदायत दी थी। उन्होंने कहा कि कुछ छात्रों ने जातिवादी टिप्पणी कर और नामपट्टिका हटाकर न सिर्फ बेटे का अपमान किया, बल्कि आदिवासी समाज की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई है। उन्होंने यह भी कहा कि घटना की जानकारी कॉलेज प्रशासन को दे दी गई है और अब पुलिस को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।
पुलिस निरीक्षक आर एच वाला ने बताया कि 19 छात्रों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें से 16 की पहचान हो चुकी है। आरोपी छात्रों पर जातिवादी टिप्पणी करने और शारीरिक हमले का आरोप है। जांच जारी है और आगे की कार्रवाई सबूतों और बयान के आधार पर की जाएगी। इस घटना ने न केवल छात्र राजनीति बल्कि कॉलेज कैंपस में जातीय भेदभाव और सुरक्षा के मुद्दे को भी गंभीर बहस का विषय बना दिया है।
