हाटकेश्वर ब्रिज विवाद, कंपनी ने कोर्ट से मांगी राहत, 30 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

अहमदाबाद का बहुचर्चित हाटकेश्वर ब्रिज मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। ब्रिज बनाने वाली कंपनी अजय इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर ने सिटी सिविल कोर्ट में आवेदन दाखिल कर अंतरिम राहत मांगी है।
हाटकेश्वर ब्रिज विवाद, कंपनी ने कोर्ट से मांगी राहत, 30 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

अहमदाबाद का बहुचर्चित हाटकेश्वर ब्रिज मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। ब्रिज बनाने वाली कंपनी अजय इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर ने सिटी सिविल कोर्ट में आवेदन दाखिल कर अंतरिम राहत मांगी है। कंपनी की मांग है कि अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (AMC) को हाटकेश्वर ब्रिज और AMTS बस टर्मिनल तोड़ने से रोका जाए। कंपनी का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट में स्पष्ट प्रावधान है कि ऐसे विवाद का निपटारा आर्बिट्रेशन से होना चाहिए, जिसकी प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हुई है। इसके अलावा कंपनी ने अनुरोध किया कि पल्लव चौक और प्रगतिनगर जंक्शन पर बने उनके अन्य ब्रिज का भुगतान न रोका जाए और यदि AMC ब्रिज तोड़ती है तो उसका खर्च कंपनी पर न डाला जाए।

30 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

कंपनी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वह 1976 से ब्रिज निर्माण के काम में है और अब तक 100 से ज्यादा ब्रिज सफलतापूर्वक बना चुकी है। AMC ने वर्ष 2015 में हाटकेश्वर ब्रिज और AMTS बस टर्मिनल बनाने का टेंडर जारी किया था, जिसे कंपनी ने समय पर स्वीकार कर 2017 में काम पूरा किया। लेकिन वर्ष 2021 में, यानी निर्माण के चार साल बाद, ब्रिज में स्पैन से जुड़ी तकनीकी खामी सामने आई। उस समय तक डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद AMC ने कंपनी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया।

अजय इंजीनियरिंग ने दलील दी कि AMC द्वारा ब्रिज गिराने का निर्णय गलत है। कंपनी का कहना है कि वह अपने खर्चे पर मरम्मत करने को तैयार है, तो फिर AMC जनता के पैसे से ब्रिज क्यों गिराना चाहती है? कंपनी का तर्क है कि उसने कई बार AMC को लिखित रूप में मरम्मत की पेशकश की, लेकिन निगम ने उसकी कोई बात नहीं मानी। कंपनी ने साफ किया कि अगर AMC खुद ब्रिज गिराती है तो उसकी जिम्मेदारी कंपनी पर नहीं डाली जानी चाहिए।

इस मामले की सुनवाई करते हुए सिटी सिविल कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड काफी भारी-भरकम है और कोई भी अंतरिम आदेश देने से पहले AMC को जवाब देने का अवसर देना होगा। अब AMC अपनी दलील कोर्ट के सामने रखेगी। मामले की अगली सुनवाई 30 अगस्त को तय की गई है, जब यह स्पष्ट होगा कि ब्रिज की मरम्मत होगी या उसे तोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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