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मेडिकल क्षेत्र में हो रहे बदलावों के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश, डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर दिया जोर, MBBS के छात्रों को दी खास सलाह

Written by:Gaurav Sharma
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राजकोट एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में कहा कि मेडिकल क्षेत्र में तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, मरीजों की देखभाल में इंसानियत और संवेदनशीलता सबसे ऊपर रहेगी। उन्होंने नए डॉक्टरों को सलाह दी कि वे एआई और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों को अपनाएं, लेकिन यह न भूलें कि डॉक्टर की एक मुस्कान और मरीज की बात सुनना कई बार दवाओं से ज्यादा असर करता है। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि डॉक्टर का पेशा सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि मानव सेवा का काम है, जिसमें धैर्य और विनम्रता बहुत जरूरी हैं।
मेडिकल क्षेत्र में हो रहे बदलावों के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश, डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर दिया जोर, MBBS के छात्रों को दी खास सलाह

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को मेडिकल क्षेत्र में हो रहे तेजी से बदलावों के बीच एक अहम संदेश दिया। राजकोट स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पहले दीक्षांत समारोह में नए डॉक्टरों को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और डिजिटल हेल्थ जैसी नई तकनीकें भले ही इलाज के तरीकों को बहुत आगे बढ़ा रही हैं, लेकिन मरीजों की देखभाल में इंसानियत और संवेदनशीलता की जगह कोई मशीन या तकनीक नहीं ले सकती। यह उनका मुख्य जोर था कि असली इलाज सिर्फ तकनीक से नहीं, बल्कि मानवीय स्पर्श से होगा, जो किसी भी यंत्र से कहीं बढ़कर है।

राष्ट्रपति ने माना कि आज के दौर में एआई, रोबोटिक्स और डिजिटल हेल्थ ने चिकित्सा विज्ञान को अभूतपूर्व तरीके से बदल दिया है। ये तकनीकें निदान को सटीक बनाती हैं, सर्जरी को कम जटिल करती हैं और मरीजों के रिकॉर्ड प्रबंधन को आसान बनाती हैं। उन्होंने नए डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे इन आधुनिक तकनीकों को सीखने और अपने काम में इस्तेमाल करने से पीछे न हटें, क्योंकि इनसे बेहतर और सटीक इलाज संभव हो पाता है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ये मशीनें कितनी भी उन्नत क्यों न हों, वे मरीज की भावनाओं, उनके डर, उनकी चिंताओं और उनकी उम्मीदों को कभी नहीं समझ सकतीं। मानवीय स्पर्श और सहानुभूति का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

मुर्मू ने समझाया कि अक्सर एक डॉक्टर की सिर्फ एक मुस्कान, मरीज से बोले गए कुछ अच्छे और हौसला बढ़ाने वाले शब्द, या सिर्फ उसकी बात को ध्यान से सुनना, दवाओं से भी ज्यादा असरदार साबित होता है। उन्होंने कहा कि मरीजों को सिर्फ शारीरिक इलाज नहीं चाहिए होता, उन्हें भावनात्मक सहारा और सहानुभूति भी चाहिए होती है, जो सिर्फ एक इंसान ही दे सकता है। तकनीक सिर्फ शरीर का इलाज कर सकती है, मन का नहीं। मरीजों के मन में विश्वास जगाना और उन्हें बीमारी से लड़ने की हिम्मत देना, एक डॉक्टर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर राष्ट्रपति का जोर

इस दौरान, राष्ट्रपति मुर्मू ने मरीजों के प्रति डॉक्टरों की बड़ी जिम्मेदारी पर भी खासा जोर दिया। उन्होंने साफ कहा कि डॉक्टर का पेशा सिर्फ जीविकोपार्जन का जरिया नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर मानव सेवा का काम है। जब कोई डॉक्टर सफेद कोट पहनता है, तो उसके साथ समाज का असीम भरोसा और एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी जुड़ जाती है, जिसे हर हाल में बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने नए डॉक्टरों को सलाह दी कि वे अपने काम में धैर्य, विनम्रता और संवेदनशीलता को प्राथमिकता दें और समाज की सेवा को अपना सबसे बड़ा लक्ष्य मानें। यह सिर्फ एक पेशेवर शपथ नहीं, बल्कि जीवन भर निभाने वाली एक नैतिक प्रतिज्ञा होनी चाहिए, जिससे मरीज और डॉक्टर के बीच विश्वास का अटूट रिश्ता बन सके।

राष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि डॉक्टर और मरीज का रिश्ता विश्वास की नींव पर खड़ा होता है। इस विश्वास को बनाए रखना हर डॉक्टर का प्राथमिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि नैतिकता और ईमानदारी, ज्ञान के साथ-साथ एक अच्छे डॉक्टर के सबसे महत्वपूर्ण गुण होते हैं। मरीजों की बात को ध्यान से सुनना और उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करना, उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर स्वस्थ रहने में मदद करता है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टरों को यह याद रखना चाहिए कि वे समाज के एक अभिन्न अंग हैं और उन्हें अपनी भूमिका को सिर्फ एक ‘प्रोवाइडर’ से बढ़कर एक ‘हीलर’ के रूप में देखना चाहिए, जो सिर्फ बीमारी का नहीं, बल्कि बीमार व्यक्ति का इलाज करता है। समाज के हर वर्ग के प्रति समान व्यवहार और देखभाल प्रदान करना हर डॉक्टर का नैतिक दायित्व है।

एम्स राजकोट के लिए विशेष सुझाव

राष्ट्रपति ने AIIMS राजकोट जैसे नए संस्थान को उसकी भविष्य की दिशा के लिए कुछ खास सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि एक नया संस्थान होने के नाते, इसे अपनी प्राथमिकताएं साफ रखनी चाहिए और उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जहाँ वास्तविक आवश्यकता है। मुर्मू ने विशेष रूप से मातृ और शिशु स्वास्थ्य, सिकल सेल एनीमिया जैसी स्थानिक बीमारियों, और ग्रामीण व आदिवासी इलाकों की स्वास्थ्य जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। ये वे क्षेत्र हैं जहाँ आज भी भारत में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है और जहाँ AIIMS राजकोट जैसे प्रतिष्ठित संस्थान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। इन विशिष्ट क्षेत्रों पर काम करके, संस्थान सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य लक्ष्यों में योगदान दे सकता है और एक मॉडल के रूप में उभर सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि संस्थान को पारदर्शिता, अच्छे प्रशासन और संसाधनों के सही इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। यह सुनिश्चित करना होगा कि हर सुविधा और संसाधन का लाभ उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है और किसी भी प्रकार की फिजूलखर्ची से बचा जाए। एक नए संस्थान के रूप में, AIIMS राजकोट के पास अपनी एक मजबूत, विश्वसनीय और अनुकरणीय पहचान बनाने का अवसर है, जो देश के अन्य चिकित्सा संस्थानों के लिए एक आदर्श बन सके। उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान के साथ-साथ सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने पर भी जोर देना चाहिए, ताकि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिल सके।

राष्ट्रपति ने एमबीबीएस के छात्रों को दी ईमानदारी और नैतिकता की सलाह

दीक्षांत समारोह के दौरान, राष्ट्रपति ने एमबीबीएस के छात्रों को यह भी सलाह दी कि वे अपने पूरे करियर में ईमानदारी और नैतिकता को हमेशा सबसे ऊपर रखें। उन्होंने दोहराया कि एक अच्छा डॉक्टर केवल वही नहीं होता जिसके पास बहुत ज्ञान हो, बल्कि वह भी होता है जो उस ज्ञान के साथ-साथ इंसानियत और सहानुभूति भी रखता हो। ज्ञान के साथ-साथ विनम्रता और सेवाभाव ही उन्हें एक सफल और सम्मानित चिकित्सक बनाएगा। इस समारोह में कुल 49 एमबीबीएस छात्रों को उनकी डिग्री प्रदान की गई और एक छात्र को पोस्ट-डॉक्टोरल सर्टिफिकेट भी मिला, जो उनके चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।

अंत में, राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश स्पष्ट था कि चिकित्सा का भविष्य भले ही तकनीक से जुड़ा हो, लेकिन उसकी आत्मा हमेशा मानवीय सेवा और संवेदना में ही निहित रहेगी। डॉक्टरों को आधुनिक विज्ञान और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाना होगा ताकि वे सिर्फ बीमारी का नहीं, बल्कि बीमार व्यक्ति का इलाज कर सकें। यह संदेश आज के दौर में, जब तकनीक तेजी से हमारे जीवन का हिस्सा बन रही है, और भी प्रासंगिक हो जाता है।

Gaurav Sharma
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