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दमोह: जागेश्वरनाथ धाम कॉरिडोर की समीक्षा बैठक में हंगामा, कलेक्टर के सामने भिड़े दो पक्ष, पुलिस को संभालना पड़ा मोर्चा, जानें पूरा मामला

Reported by:Dinesh Agarwal|Edited by:Shyam Dwivedi
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दमोह के जागेश्वरनाथ धाम बांदकपुर में कॉरिडोर बैठक के दौरान कलेक्टर के सामने हंगामा हुआ। सरपंच और शिवभक्त अतिक्रमण को लेकर भिड़ गए, बात हाथापाई तक पहुंची, पुलिस ने मोर्चा संभाला।
दमोह: जागेश्वरनाथ धाम कॉरिडोर की समीक्षा बैठक में हंगामा, कलेक्टर के सामने भिड़े दो पक्ष, पुलिस को संभालना पड़ा मोर्चा, जानें पूरा मामला

दमोह के देश-दुनिया में विख्यात जागेश्वरनाथ धाम बांदकपुर में शनिवार को एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया। प्रदेश सरकार द्वारा उज्जैन की तर्ज पर विकसित किए जा रहे कॉरिडोर परियोजना की समीक्षा बैठक में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की मौजूदगी में ही दो पक्ष आपस में भिड़ गए, जिससे मौके पर अराजकता का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल को तत्काल मोर्चा संभालना पड़ा।

दरअसल, दमोह के इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर एक विशाल कॉरिडोर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस परियोजना की मौजूदा स्थिति और कार्यों की प्रगति का जायजा लेने के लिए कलेक्टर अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ बांदकपुर पहुंचे थे। ग्राउंड पर निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने के बाद, मंदिर के कार्यालय कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में कलेक्टर, अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और मंदिर ट्रस्ट कमेटी के पदाधिकारी मौजूद थे।

बैठक शांतिपूर्ण माहौल में चल रही थी कि अचानक उसमें गहमागहमी बढ़ गई। क्षेत्रीय सरपंच और स्थानीय शिव भक्तों के बीच किसी मुद्दे को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। विवाद की जड़ लंबे समय से चला आ रहा एक आरोप था, जिसके अनुसार मंदिर परिसर के ठीक पास सरपंच सुनील डबलुया द्वारा कथित तौर पर अतिक्रमण किया गया है। यह अतिक्रमण का मुद्दा पहले भी कई बार क्षेत्र में तनाव का कारण बन चुका था।

बैठक में आग बबूला हुए सरपंच सुनील डबलुया

बैठक में भी जैसे ही यह संवेदनशील मुद्दा उठा, सरपंच सुनील डबलुया आग बबूला हो गए। उनकी प्रतिक्रिया ने स्थिति को और भड़का दिया। इसके बाद शिव भक्तों और सरपंच के बीच जोरदार चिल्लाचोट शुरू हो गई। बात सिर्फ मौखिक बहस तक सीमित नहीं रही, बल्कि देखते ही देखते माहौल इतना बिगड़ गया कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई तक की नौबत आ गई।

इस दौरान बैठक में मौजूद लोगों ने, जिनमें स्वयं कलेक्टर जैसे जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी, अन्य आला अफसर और मंदिर ट्रस्ट कमेटी के सम्मानित पदाधिकारी शामिल थे, उनका भी कोई लिहाज नहीं किया। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर टूट पड़े और खुलेआम भिड़ गए। यह नजारा बेहद चौंकाने वाला था, क्योंकि उच्चाधिकारियों की उपस्थिति में इस तरह का टकराव बिल्कुल अप्रत्याशित था।

सुरक्षाकर्मियों ने संभाला मोर्चा

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए, मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों और अधिकारियों की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने सक्रियता दिखाते हुए दोनों पक्षों को अलग किया और बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रण में लाने का प्रयास किया। पुलिस और सुरक्षाकर्मियों के त्वरित हस्तक्षेप के बाद ही वहां व्याप्त अराजकता पर काबू पाया जा सका और हालात सामान्य हुए।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद कलेक्टर ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने दोनों पक्षों को शांत करने और विवाद को सुलझाने के लिए अपनी समझाइश दी। कलेक्टर की समझाइश का असर हुआ और दोनों पक्षों ने अपनी खामोशी पकड़ ली। बाद में, कलेक्टर ने बताया कि विवाद को सफलतापूर्वक टाल दिया गया है और अब सभी संबंधित पक्षों ने क्षेत्र के विकास के लिए अपनी सहमति व्यक्त की है। इस घटना ने एक बार फिर मंदिर परिसर के आसपास अतिक्रमण जैसे संवेदनशील मुद्दों को उजागर किया है, जिन पर भविष्य में अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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