वडोदरा: गुजरात के वडोदरा में आयोजित ‘आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन’ के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘वनवासी’ शब्द का इस्तेमाल करके आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन के मालिकाना हक से वंचित करने की साजिश की जा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी सरकार आदिवासियों के हितों की अनदेखी कर देश का धन कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को सौंप रही है।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने ‘आदिवासी’ और ‘वनवासी’ शब्दों के बीच के गहरे अंतर को समझाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस जानबूझकर ‘वनवासी’ शब्द का प्रयोग करते हैं, जिसका मतलब है कि आप सिर्फ जंगल में रहते हैं, लेकिन इस देश के असली मालिक नहीं हैं।

‘आदिवासी’ का मतलब असली मालिक

राहुल गांधी ने विस्तार से बताते हुए कहा, “अगर कोई 5000 साल पहले यहां आता, तो सारी जमीन आदिवासियों के नाम होती। आदिवासी का मतलब है इस देश के ओरिजिनल मालिक। अगर आप आदिवासी हो तो इस देश का आप पर कर्ज है। आपकी जमीन, जंगल आपसे छीना गया।” उन्होंने इसके विपरीत ‘वनवासी’ शब्द को आदिवासियों के अधिकारों पर हमला बताया।

“आरएसएस और बीजेपी का शब्द है वनवासी। मतलब आप ओरिजिनल मालिक नहीं। ये देश आपका था पर ओरिजिनल मालिक कोई और था। लेकिन वनवासी मतलब आप कुछ नहीं।”- राहुल गांधी

उन्होंने आगे कहा कि जब सरकार आपकी जमीन छीनकर अडाणी जैसे उद्योगपतियों को देती है, तो यह सिर्फ संविधान पर ही नहीं, बल्कि बिरसा मुंडा जैसे महापुरुषों के विचारों पर भी सीधा आक्रमण है।

निजीकरण और जातिगत जनगणना पर सरकार को घेरा

राहुल गांधी ने देश में बढ़ते निजीकरण को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “प्राइवेटाइजेशन का मतलब है चुने हुए 5-7 लोगों का फायदा। पहले पब्लिक सेक्टर था उसमें आदिवासी, दलित जा सकते थे। अब अडानी की लिस्ट खोलो, एक आदिवासी नहीं मिलेगा। ब्यूरोक्रेट में भी आदिवासी नहीं मिलेंगे।” उन्होंने सवाल किया कि देश के प्राइवेट अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और बड़ी कंपनियों में एक भी आदिवासी मालिक क्यों नहीं है।

उन्होंने जातिगत जनगणना की अपनी मांग को दोहराते हुए कहा, “मैं जाति जनगणना की बात करता हूं तो आरएसएस, मोदी और बीजेपी मुझ पर आक्रमण करती हैं। इस देश में 10% आदिवासी, 15% दलित, 50 प्रतिशत ओबीसी हैं।” उन्होंने कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने यह कर दिखाया है और यह जानना जरूरी है कि देश की संस्थाओं, ब्यूरोक्रेसी और कॉरपोरेट्स में किसकी कितनी हिस्सेदारी है।

‘अडाणी का कर्ज माफ, गरीबों की अनदेखी’

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों के कर्ज माफ कर रही है, लेकिन देश के आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों को कुछ नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा, “आप जितना टैक्स अडानी देता है, उतना ही आप भी देते हैं। उसकी और आपकी आमदनी देखिए। आप बताइए, आपका कितने का कर्ज माफ हुआ?” उन्होंने केरल का एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि जब उनसे पूछा गया कि आदिवासियों को मुफ्त की चीजें कब मिलनी बंद होंगी, तो उन्होंने जवाब दिया, “जब अडाणी का बंद होगा तब इनका भी होगा।” उन्होंने मनरेगा को खून-पसीने की कमाई बताते हुए कहा कि इसे ‘फ्री’ कहना मजदूरों का अपमान है।