गुजरात बीते तीन दशकों से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मजबूत गढ़ माना जाता है। इसके पीछे आरएसएस की पकड़, बीजेपी की हिंदुत्व राजनीति और सबसे अहम वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता है। वडोदरा को पीएम मोदी की राजनीतिक यात्रा से गहराई से जुड़ा माना जाता है। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव 2024 में जब स्थानीय सांसद को लेकर नाराजगी सामने आई, तो पार्टी ने प्रत्याशी बदलने का फैसला लिया और अंततः नए चेहरे डॉ. हेमांग जोशी को लोगों ने भारी समर्थन दिया। लेकिन अब इसी वडोदरा में ‘मोदी लवर्स’ ने नया संगठन वडोदरा नवनिर्माण संघ (VNS) बना दिया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
वडोदरा नवनिर्माण संघ (VNS) को 23 अगस्त को लॉन्च किया गया और कुछ ही दिनों में 6 हजार प्रभावशाली लोग इससे जुड़ गए। इस संगठन के सलाहकारों में आरएसएस से जुड़े वरिष्ठ चेहरे कीर्ति एन. परिख और भालचंद्र पाठक शामिल हैं। साथ ही, हरनी बोट कांड के पीड़ितों का केस लड़ने वाले एडवोकेट हितेश गुप्ता और एमएसयू के प्रोफेसर सतीश पाठक भी इससे जुड़े हैं। संयोजक हार्दिक दोशी का कहना है कि संगठन का मकसद वडोदरा के विकास के लिए अच्छे चेहरे सामने लाना है। परिख का मानना है कि शहर में जो हालात हैं, वे नरेंद्र मोदी की सोच के विपरीत हैं। उन्होंने साफ किया कि यदि राजनीतिक दल उपयुक्त उम्मीदवार नहीं देंगे, तो संगठन विकल्प तलाशने पर विचार करेगा।
बीजेपी के लिए बढ़ी मुश्किलें
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह संगठन बीजेपी के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है। 2015 में बीजेपी ने 19 वार्ड की 76 सीटों में से 67 पर जीत हासिल की थी, लेकिन गुटबाजी और अनुशासनहीनता के चलते पार्टी ने अपने दो हिंदुत्ववादी पार्षदों आशीष जोशी और अल्पेश लिंबाचिया को निष्कासित कर दिया। परिख ने कहा कि वडोदरा नरेंद्र मोदी की कर्मभूमि रही है और यहां की जनता का उनसे अटूट लगाव है। यही वजह है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी ने यहां से नामांकन भरते ही रिकॉर्ड वोटों से जीत दर्ज की थी।
वडोदरा नवनिर्माण संघ के उभार की एक वजह स्थानीय कार्यकर्ताओं में बाहरी नेताओं को तवज्जो मिलने की नाराजगी भी है। मौजूदा सांसद डॉ. हेमांग जोशी पोरबंदर से आते हैं और शहर अध्यक्ष डॉ. जयप्रकाश सोनी पाटन के रहने वाले हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि बाढ़, हरनी बोट कांड और विकास कार्यों की कमी से शहरवासियों की नाराजगी बढ़ी है। वहीं, सभी विधायक बीजेपी के होने के बावजूद वडोदरा से किसी को मंत्री पद नहीं मिला है। इस नाराजगी को भुनाने के लिए महेंद्र सिंह राठौड़ ‘बापू’ जैसे स्थानीय नेता भी वीएनएस से जुड़े हैं।
नगर निगम चुनाव नजदीक हैं और ऐसे में बीजेपी के लिए चुनौती और बढ़ गई है। निलंबित पार्षद आशीष जोशी अपने समर्थकों के साथ नए राजेश आयरे के तौर पर उभर रहे हैं। आयरे परिवार पहले से ही वडोदरा की राजनीति में मजबूत पकड़ रखता है। इसके अलावा बाहुबली मधु श्रीवास्तव की सक्रियता ने भी हालात बदल दिए हैं। हालांकि कांग्रेस अभी कमजोर स्थिति में है और संगठनात्मक स्तर पर पिछड़ी हुई है, लेकिन वडोदरा नवनिर्माण संघ की सक्रियता से बीजेपी को नगर निगम चुनावों में कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है।





