करोड़ों खर्च, फिर भी बूंद-बूंद को तरसते बीनागंज और चाचोड़ा के लोग

करोड़ों खर्च, फिर भी बूंद-बूंद को तरसते बीनागंज और चाचोड़ा के लोग

गुना| विजय कुमार जोगी| गर्मियां शुरू होते ही जहां एक तरफ लोग कोरोना संकट से अभी तक निजात नहीं पा सके हैं ऐसे में अब पीने के पानी की किल्लत लोगों को अभी से सताने लगी है| गुना जिले के चाचौड़ा नगर परिषद द्वारा करोड़ों रुपए की राशि खर्च कर कर आरो प्रोजेक्ट लगाया गया लेकिन आज तक इस प्रोजेक्ट को नगर परिषद और निर्माणाधीन कंपनी जरूरी नहीं कर पाई जिसके चलते लोगों को इसका खामियाजा उठाना पड़ रहा है |

कई किलोमीटर दूर से लोग आज भी पानी लाने को मजबूर है बीनागंज चाचौड़ा क्षेत्र में जहां से दोनों नगरों में पीने का पानी सप्लाई होता है वहां की स्थिति भी दम तोड़ती नजर आ रही है और पीने के पानी को लेकर लोग परेशान दिख रहे हैं कई किलोमीटर दूर से लोग पीने के पानी ला रहे हैं|

इस मामले में जब नगर परिषद सीएमओ से मोबाइल पर बात की तो पता चला कि मेंटेनेंस के चलते यह परेशानी सामने आई है लेकिन सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि प्रदेश सरकार द्वारा करोड़ों रुपए की योजना चाचौड़ा और बीनागंज शहर को मिली थी लेकिन उसका काम आज भी ठंडे बस्ते में डाला हुआ है| जबकि अधिकारी यह कहते हैं कि जल्द से जल्द आरो प्रोजेक्ट शुरू होने वाला है जिससे बीनागंज और चाचौड़ा शहर को साफ और स्वच्छ पानी पर्याप्त मात्रा में मिल सके हैं लेकिन जनता के पीछे अपनी राजनीति चमकाने वाले नेता और अधिकारी अपनी कॉलर ऊंची करने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं लेकिन जनता की परेशानी को समझने वाला कोई नहीं मिल रहा है जिसका खामियाजा स्वयं जनता उठा रही है और लोग दूर-दूर से पीने के पानी लाने को मजबूर है और नगर परिषद द्वारा जो पानी नगर में सप्लाई भी किया जा रहा है तो वह पानी पीने योग्य भी नहीं है|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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