पुलिसकर्मी बना गुंडा

पुलिसकर्मी बना गुंडा

गुना।बीते महिने एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद पुलिस लाइन में पदस्थ प्रधान आरक्षक हरीश राजपूत को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।बर्खास्तगी के बाद हरीश ने एसपी के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपशब्द लिखे थे, जिसके बाद बर्खास्त पुलिसकर्मी पूर्व प्रधान आरक्षक हरीश राजपूत का नाम गुंडा सूची में जोड़ दिया गया है।अब पुलिस लगातार हरीश पर निगरानी बनाए हुए है।

आरोप है कि महिलाओं को धमकाने के आरोप में हरीश को बर्खास्त किया गया था।प्रधान आरक्षक हरीश राजपूत विशेष शाखा में पदस्थ थे। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद एसपी ने सस्पेंड कर दिया था। राजपूत को बहाली के बाद पुलिस लाइन में तैनात किया गया। एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने बताया कि प्रधान आरक्षक ने फरियादिया अजब बाई के शपथ पत्र अपने बचाव में प्रस्तुत किए थे, लेकिन अजब बाई ने लिखित में आवेदन देकर शिकायत कर कहा कि उसे पकड़कर जबरन यह शपथ पत्र बनवाए गए हैं। सीएसपी की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद प्रधान आरक्षक हरीश राजपूत को बर्खास्त कर दिया है। इसके खिलाफ चार आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।फिलहाल पुलिस हरीश पर निगरानी बनाए हुए है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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