
Guna District Hospital News : मध्य प्रदेश के गुना जिला अस्पताल में उपचार कराने वाले अधिकांश मरीज गरीब तबके से आते हैं, जो निजी अस्पतालों और मेडीकल की दवाइयों का खर्च नहीं झेल सकते हैं। इसलिए सरकारी अस्पताल में उपचार कराना इनकी मजबूरी है। हालांकि मरीजों को नहीं पता कि निशुल्क उपचार उन्हें इतना महंगा पड़ जाएगा कि कई महीनों की मजदूरी एक साथ स्वाहा हो जाएगी।
यह है मामला
बता दें कि जिला अस्पताल के मेडीकल वार्ड में भर्ती दो मरीजों के साथ कुछ ऐसा ही वाक्या हुआ है कि उन्हें निशुल्क उपचार निजी अस्पतालों से ज्यादा महंगा पड़ गया है। दरअसल अस्पताल के मेडीकल, सर्जीकल और ट्रामा वार्ड में चोरी की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शनिवार-रविवार की रात भी दो मरीजों के मोबाइल चोरी चले गए। चिंता की बात यह है कि चोरी की यह वारदात रात लगभग 1 बजे के बाद हुई है, जब परिसर में अस्पताल स्टाफ, मरीज और उनके अटेंडरों के अलावा कोई नहीं आता है।
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पुलिस से लगाई गुहार
मेडीकल वार्ड में उपचार करा रहे सतीश रजक ने भी रात लगभग डेढ़ बजे मोबाइल बंद कर अपने तकिये के नीचे रख लिया था। सुबह 4 बजे आंख खुली तो मोबाइल गायब था। सतीश के मोबाइल की कीमत लगभग 13 हजार रुपए थी, जिसे मजदूरी कर बमुश्किल से वे खरीद पाए थे। इसी वार्ड के बैड नम्बर 1 पर भर्ती धमनार निवासी धर्मेन्द्र ओझा का मोबाइल भी चोरी हुआ है। धर्मेन्द्र के मोबाइल की कीमत करीब 8 हजार रुपए है, लेकिन उसके कवर के अंदर धर्मेन्द्र ने डेढ़ हजार रुपए रखे थे, ताकि यह राशि मुश्किल परिस्थितियों में काम आ सके। दोनों ही मरीज और उनके परिजन चोरी की इस घटना के बाद बेहद दुखी नजर आए। उन्हें जिला अस्पताल में आने का पछतावा भी हो रहा था। सतीश रजक और धर्मेन्द्र ओझा दोनों की पत्नियों ने कोतवाली पुलिस में आवेदन दिया है और पुलिस से गुहार लगाई है कि अगर जिला अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले जाएं तो शायद उनका मोबाइल उन्हें वापस मिल सके।
गुना से संदीप दीक्षित की रिपोर्ट
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