अब सिंधिया समर्थक के पोस्टर से गायब नरेंद्र सिंह तोमर, चर्चाओं का बाजार गर्म

अब सिंधिया समर्थक के पोस्टर से गायब नरेंद्र सिंह तोमर, चर्चाओं का बाजार गर्म

गुना | विजय कुमार जोगी| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में उपचुनाव (By-election) को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है, नेताओं ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है| इस बीच भाजपा (BJP) नेताओं के समर्थन में लगे पोस्टर भी चर्चा के बने हुए हैं| पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आये ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) की पोस्टरों से फोटो गायब होने का मुद्दा गर्माया था, अब सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री के पोस्टर में भाजपा के दिग्गज नेता नरेंद्र तोमर (Narendra Tomar) की फोटो न होना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है|

गुरूवार को गुना जिले की बमोरी विधानसभा सीट जहां से पूर्व श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया बीजेपी की तरफ से उम्मीदवार हो सकते हैं| यहां अभिषेक सिसोदिया के कार्यकर्ताओं ने गुुना के कई चौराहों पर महेंद्र सिंह सिसोदिया केपोस्टर लगाए| इन पोस्टरों में सिंधिया की फोटो को जहां शामिल किया गया, वहीं बीजेपी के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर नदारद दिखे|

पोस्टर से तोमर की फोटो गायब होने का मामला सियासी गलियारों में चर्चा में आ गया है| सवाल खड़े हो रहे हैं क्या कांग्रेस से बीजेपी में आए नेताओं को पुराने नेता रास नहीं आ रहे हैं और अपने चहेते नेताओं के फोटो लगे पोस्टर चौराहों पर लगा कर अपने प्रत्याशी का प्रचार कर रहे हैं |

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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