100 स्थापना दिवस : “कम्युनिस्ट पार्टी का संघर्ष हर उस वंचित की आवाज है जो अपने श्रम को बेचकर अपना परिवार चलाता है”

100 स्थापना दिवस : “कम्युनिस्ट पार्टी का संघर्ष हर उस वंचित की आवाज है जो अपने श्रम को बेचकर अपना परिवार चलाता है”

ग्वालियर, अतुल सक्सेना| कम्युनिस्ट पार्टी का संघर्ष हर उस वंचित की आवाज है जो अपने श्रम को बेचकर अपना परिवार चलाता है। फिर चाहे वह नगर निगम में काम करने वाला मजदूर हो या फिर महाराज बाड़े पर फूटपाथ पर बैठकर अपना सामान बेचने का काम करता है। यह लाल झण्डा उस मजदूर का है जो सुबह से शाम तक अपने श्रम को बेचने के लिए चौराहे पर मजदूर के रूप में खड़ा होता है, यह लाल झण्डा हर तरफ के मजदूरों के सघर्षों में नजर आने वाला झण्डा है। यह झण्डा उस किसान का भी है जो अपनी फसलों के वाजिब हक और अधिकार के लिए संघर्षों में नजर आता है। ये बात कम्युनिस्ट पार्टी ने नेताओं ने पार्टी का 100 वा स्थापना मनाते हुए कही।

ग्वालियर में आयोजित कम्युनिस्ट पार्टी के 100 वे स्थापना दिवस पर नई सड़क डिलाईट टॉकीज के पीछे स्थित पार्टी के जिला मुख्यालय पर ध्वजारोहण किया गया और एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। पार्टी ने इस मौके पर उपनगर ग्वालियर, मुरार, डबरा में भी पार्टी कार्यालयों पर झण्डा फहराया । नेताओं ने बताया कि कम्युनिस्ट आंदोलन को आज 17 अक्टूबर 2020 को सौ वर्ष पूरे हुए। इस उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिवमण्डल सदस्य कॉमरेड बादल सरोज,कॉमरेड प्रमोद प्रधान व रामविलास गोस्वामी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कॉमरेड अखिलेश यादव ने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी के सौ वर्षों का इतिहास संघर्षों का इतिहास रहा है। कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी स्थापना काल से ही मेहनतकश वर्गों को आवाज दी और उनके संघर्षों में हमेशा साथ रहा है। कम्युनिस्ट पार्टी का ग्वालियर में भी संघर्षों का इतिहास रहा है। इसकी विरासत को विख्यात किसान नेता गोटू सहाय से लेकर नंदराम सिंह लोधी की शहादत से लेकर विद्याराम रजक की शहादत तक का रहा है। जिन्होंने दलित, वंचित समुदाय को भूमि के अधिकार को दिलाने के लिए अपनी शहादतें दी हैं।

उन्होंने कहा कम्युनिस्ट पार्टी का संघर्ष हर उस वंचित की आवाज है जो अपने श्रम को बेचकर अपना परिवार चलाता है। फिर चाहे वह नगर निगम में काम करने वाला मजदूर हो या फिर महाराज बाड़े पर फूटपाथ पर बैठकर अपना सामान बेचने का काम करता है। यह लाल झण्डा उस मजदूर का है जो सुबह से शाम तक अपने श्रम को बेचने के लिए चौराहें पर मजदूर के रूप में खड़ा होता है, यह लाल झण्डा हर तरफ के मजदूरों के सघर्षों में नजर आने वाला झण्डा है। यह झण्डा उस किसान का भी है जो अपनी फसलों के वाजिब हक और अधिकार के लिए संघर्षों में नजर आता है। आज कुछ चंद पूंजीपति अपनी पूंजी के दम पर संविधान द्वारा दी गई लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही खत्म करने पर तुला है, इसका ताजा उदाहरण हमारे प्रदेश में थोपा गया उपचुनाव है। इसलिए हमें आज यह भी शपथ लेने की आवश्यकता है कि इस चुनाव में इन बिकाऊ लालों को सबक सिखाएं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रीति सिंह ने की तथा पार्टी का झण्डा आकांक्षा धाकड़ ने फहराया। कार्यक्रम का संचालन श्याम यादव ने किया।

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