एडवोकेट अनिल मिश्रा को मिली जमानत, हाई कोर्ट ने पुलिस कस्टडी को गलत माना, 1 लाख रुपये के मुचलके पर छोड़ने का आदेश

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने पुलिस की कस्टडी को गलत माना और 1 लाख रुपये के मुचलके पर एडवोकेट अनिल मिश्रा को छोड़ने के आदेश दिए।
एडवोकेट अनिल मिश्रा को मिली जमानत, हाई कोर्ट ने पुलिस कस्टडी को गलत माना, 1 लाख रुपये के मुचलके पर छोड़ने का आदेश

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एडवोकेट अनिल मिश्रा की जमानत को मंजूर कर उन्हें रिहा करने के आदेश दिए हैं, कोर्ट ने तीन दिन तक सुनवाई करने के बाद कल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे आज बुधवार को सुनाया, कोर्ट ने पुलिस की कस्टडी को गलत माना और 1 लाख रुपये के मुचलके पर एडवोकेट अनिल मिश्रा को छोड़ने के आदेश दिए।

डॉ भीमराव अम्बेडकर के चित्र को जलाने के आरोप में एससी एसटी एक्ट के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजे गए एडवोकेट अनिल मिश्रा की जमानत अर्जी को आज हाईकोर्ट ग्वालियर ने स्वीकार कर लिया, हाई कोर्ट की डबल बेंच ने  सुनवाई करते हुए पुलिस एफआईआर को सही माना लेकिन पुलिस कस्टडी को गलत माना।

हाई कोर्ट ने ये कहा फैसले में 

मिश्रा के वकीलों राजीव मिश्रा, आरके जोशी के मुताबिक कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा एफआईआर के बाद नोटिस देकर अनिल मिश्रा को छोड़ा जा सकता था लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया, अदालत ने सवाल किया कि जब अम्बेडकर का चित्र जलाया जा रहा था तो पुलिस क्या कर रही थी जबकि आईजी ऑफिस और एसपी ऑफिस दोनों सामने हैं ऐसे में पुलिस ने रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया।

चार दिन पहले पुलिस ने किया था गिरफ्तार 

बता दें पुलिस ने अनिल मिश्रा और उनके साथियों को चार दिन पहले गिरफ्तार किया था उसके बाद  JMFC मधुलिका खत्री की कोर्ट ने उन्हें 14 जनवरी तक के लिए जेल भेज दिया था, इस गिरफ़्तारी के विरोध में अनिल मिश्रा की तरफ से याचिका दायर की गई थी जिसमें तीन दिन तक लगातार सुनवाई चली और आज कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया, वकीलों के मुताबिक अनिल मिश्रा के साथ गिरफ्तार अन्य साथियों के मामले में भी आज सुनवाई है उम्मीद है उन्हें भी आज जमानत मिल जाएगी और शाम तक सभी रिहा हो जायेंगे।

फरियादी पक्ष के वकील ने कही ये बात 

उधर इस मामले में फरियादी पक्ष के वकील धर्मेंद्र कुशवाह ने कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए पुलिस और सरकार पर आरोप लगाये उन्होंने कहा पुलिस ने कमजोर कार्रवाई की जो नहीं की जानी चाहिए थी, उन्होंने 1 लाख रुपये के मुचलके पर कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने को उचित बताया। उन्होंने कहा बाबा साहब का अपमान स्वीकार नहीं किया जायेगा और हम इसकी लड़ाई लड़ते रहेंगे।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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