JU के हॉस्टल में फंसे छात्रों को खाने का संकट, मैनेजमेंट बेखबर, CM से लगाई मदद की गुहार

JU के हॉस्टल में फंसे छात्रों को खाने का संकट, मैनेजमेंट बेखबर, CM से लगाई मदद की गुहार

ग्वालियर।अतुल सक्सेना| लॉक डाउन (Lockdown) लागू होने के बाद जीवाजी विश्वविद्यालय (Jiwaji University) के हॉस्टल में रह रहे बहुत से छात्र फंस गए। क्लासेस बंद है ऐसे में विवि प्रबंधन द्वारा उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) को भ्रमित करते हुए गलत जानकारी दे दी कि सभी हॉस्टल खाली हो चुके हैं। हालात ये हैं कि अब छात्रों को खाने का संकट खड़ा हो गया है। परेशान छात्रों ने अब प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपने राज्यों में भेजने की गुहार लगाई है।

ग्वालियर (Gwalior) के जीवाजी विश्वविद्यालय में मध्य प्रदेश के अलावा कई राज्यों के छात्र पढ़ाई करते हैं। लॉक डाउन से पहले ज्यादातर छात्र अपने घर जा चुके थे, लेकिन बाहरी राज्यों के कुछ छात्रों का रिजर्वेशन 25 से 30 मार्च के बीच का था लेकिन लॉक डाउन के चलते ट्रेन बंद हो गई और करीब 14 छात्र और 20 छात्राएं ग्वालियर में ही फंस गए। जेयू के कैप्टन रूप सिंह स्पोर्ट्स हॉस्टल में दूसरे राज्यों के पांच छात्र फंसे हैं । छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 24 मार्च को उच्च शिक्षा विभाग को गलत जानकारी भेजी थी, कि ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय के हॉस्टल में अन्य राज्यों का कोई भी छात्र नहीं है। जबकि हम यहीं फंसे हैं। अब हालात ये हैं कि अब इन छात्रों के पास ना राशन है और ना ही पैसा है। इतना ही नहीं प्रबंधन ने हॉस्टलों में 25 मार्च से मेस भी बंद करा दी है। हॉस्टल में फंसे इन छात्रों की तरफ किसी का ध्यान नहीं है । छात्र विनोद और जयप्रकाश का कहना है कि मैनेजमेंट की गलती का खामियाजा हम भुगत रहे हैं। यदि सही जानकारी दी होती तो संभव है जिला प्रशासन कोई मदद करता। ऐसे में परेशान इन छात्रों ने मुख्यमंत्री शिवराज चौहान को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। छात्रों ने लिखा कि मामाजी हमें हमारे घर भिजवा दीजिए। मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने की जानकारी लगते ही विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया।विश्वविद्यालय अब इन छात्रों के भोजन के इंतजाम और घर भिजवाने की व्यवस्था करने की बात कह रहा है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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