“मैं भी सचिन हूं” का पोस्टर चिपकाकर NSUI का प्रदर्शन, पुतला फूंका, अनिश्चित कालीन धरना शुरू

“मैं भी सचिन हूं” का पोस्टर चिपकाकर NSUI का प्रदर्शन, पुतला फूंका, अनिश्चित कालीन धरना शुरू

ग्वालियर। प्रदेश महासचिव की गिरफ्तारी के विरोध में NSUI में जबरदस्त आक्रोश है। छात्र नेताओं ने जहां विश्वविद्यालय में “मैं भी सचिन हूं” का पोस्टर अपने कपड़ों पर चिपकाकर प्रदर्शन किया और विश्व विद्यालय के मेन गेट पर अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया। वहीं MLB काॅलेज में छात्र नेताओं ने कुलपति का पुतला जलाया और नारेबाजी की।

जीवाजी विश्व विद्यालय की कुलपति श्रीमती संगीता शुक्ला को हटाने की मांग को लेकर चल रहा NSUI का आंदोलन अब तेजी पकड़ चुका है । कल हुई प्रदेश महासचिव सचिन द्विवेदी की गिरफ्तारी के बाद छात्र नेता अब आर पार के मूड में आ गए हैं। आज दिनभर छात्रों ने विश्व विद्यालय परिसर में हंगामा किया और कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी छात्र अपने पेट पर ” मैं भी सचिन हूं” का पोस्टर चिपकाकर प्रदर्शन कर रहे थे। पूरे परिसर में हंगामा करने के बाद छात्र अनिश्चित कालीन धरने पर बैठ गए। छात्रों। का कहना है कि हमारा यू आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा जबतक कुलपति को यहां से हटाया नहीं जाता हम चुप नहीं बैठने वाले। उधर NSUI के छात्र नेताओं ने MLB काॅलेज में भी हंगामा किया और वहां कुलपति का पुतला फूंका। गौरतलब है कि शुक्रवार को ज्ञापन देने गए प्रदेश महासचिव सचिन द्विवेदी को पुलिस ने उनके पांच साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया था और फिर सचिन पर बॉन्ड ओवर की कार्रवाई कर जेल भेज दिया। सचिन की गिरफ्तारी के बाद से NSUI के कार्यकर्ता गुस्से में हैं और उन्होंने आर पार की लड़ाई की घोषणा कर दी है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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