किसानों के चक्काजाम का डबरा में दिखा व्यापक असर, अन्य दल के नेता भी समर्थन में आये

किसानों के चक्काजाम का डबरा में दिखा व्यापक असर, अन्य दल के नेता भी समर्थन में आये

डबरा, सलिल श्रीवास्तव| देश में लंबे समय से जारी किसान आंदोलन (Farmers Protest) का व्यापक असर डबरा (Dabra) में लगातार देखने को मिलता रहा है| आज प्रदेश व्यापी चक्काजाम के आवाहन के तहत डबरा और भितरवार क्षेत्र के किसानों ने एनएच 44 ग्वालियर झांसी हाईवे पर सिमरिया टेकरी के पास जाम लगा दिया| जाम की सूचना पर प्रशासन पहले से ही सतर्क बना हुआ था यही कारण रहा कि रूट को डाइवर्ट किया गया तो आसपास के क्षेत्र से भारी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया|

चक्का जाम में किसानों द्वारा किसान विरोधी बिल को लेकर जमकर नारेबाजी की गई, सबसे बड़ी बात किसानों के साथ-साथ कई अन्य संगठन भी जाम स्थल पर पहुंचे | जिसमें डबरा से कांग्रेसी विधायक सुरेश राजे भी शामिल रहे। इस पूरे आंदोलन में किसानों द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से जाम किया गया सबसे बड़ी बात मुख्य मार्गों पर आने वाली एंबुलेंस को बाकायदा रास्ता दिया गया, ताकि गंभीर मरीज अपने इलाज को जा सके|

वहीं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को जाम के दौरान वापस जाना पड़ा। धरना स्थल पर किसानों के साथ डबरा विधायक सुरेश राजे ने मोदी सरकार पर स्पष्ट तौर पर आरोप लगाए | उन्होंने कहा कि मोदी जी इस बिल को वापस लेने के लिए इसलिए नहीं झुक रहे क्योंकि उनके पास evm है जब उनसे पूछा कि अन्य राज्यों में कांग्रेस की सरकार कैसे हैं तो उनका कहना था कि उन्हें सिर्फ केंद्र की सरकार बचानी थी इसीलिए कई राज्यों में कांग्रेस की सरकार है साथ ही उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयुक्त किसान आंदोलन के मध्य चुनाव मतपत्रों से करने की बात की घोषणा करते हैं तो मोदी जी स्वत: ही इस बिल को वापस ले लेंगे| नहीं तो उन्हें आगामी चुनाव में हार का सामना करना पड़ेगा।

बता दें कि मध्यप्रदेश में डबरा किसान आंदोलन का केंद्र बन चुका है पिछले विधानसभा चुनाव में भी यहां के किसानों ने लगातार विरोध किया था जिसका खामियाजा डबरा विधानसभा सीट से भाजपा को हार का मुंह देख कर भुगतना पड़ा था उसके बाद लगातार डबरा में आंदोलन मुखर होता दिख रहा है | एक किसान की मौत भी इस आंदोलन के दौरान हो चुकी है, जिसे क्षेत्रीय किसान शहीद का दर्जा दे रहे हैं | फ़िललाल डबरा क्षेत्र इस आंदोलन का केंद्र बन चुका है आंदोलन को लेकर कोई भी घोषणा होने पर प्रशासन पूरी तरीके से मुस्तैद होता दिखाई पड़ता है| आज भी जाम को लेकर प्रशासन ने पुख़्ता इंतज़ाम किये थे साथ ही किसान नेताओं से चर्चा करके तय किया था कि कोई अप्रिय स्थिति निर्मित ना हो।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews