Father’s Day पर भावुक हुए कांग्रेस MLA, पिता को किया कुछ इस अंदाज में याद

Father’s Day पर भावुक हुए कांग्रेस MLA, पिता को किया कुछ इस अंदाज में याद

ग्वालियर।अतुल सक्सेना। राजनीति में पिछले कुछ दिनों में जो वैचारिक बदलाव आया है उससे ये संदेश जाता है कि नेता का संजीदगी से जैसे नाता ही टूट गया है लेकिन ग्वालियर दक्षिण विधायक ने father’s Day par कुछ ऐसा किया जिससे ये उम्मीद अभी जिंदा कि राजनीति में अभी संजीदा लोग भी मौजूद हैं। दरअसल ग्वालियर दक्षिण विधानसभा से कांग्रेस के युवा विधायक प्रवीण पाठक ने रविवार को father’s Day पर अपने पिता को याद करते हुए फेस बुक पर एक कविता पोस्ट की है । विधायक श्री पाठक ने कविता के माध्यम से अपने दिल की बात लिखते हुए फादर्स डे की बधाइयां दी हैं एवं पिता को याद किया है।

विधायक ने लिखा…

वो हमारा ज़मीर भी हैं और जागीर भी हैं

वो हमारी शान भी हैं और स्वाभिमान भी हैं

वो हमारे लिए सख़्त भी हैं और सशक्त भी हैं

उनसे ही प्रशांत भी हैं और प्रवीण भी हैं

वो हमारा वर्तमान भी हैं और भविष्य भी हैं

वो हमारी विरासत भी हैं और अमानत भी हैं

उनकी कृपा से हम खुश भी हैं और सलामत भी हैं

वो हमारे पिता भी हैं और परम परमेश्वर भी हैं

हमारे लिए तो वही गुप्तेश्वर भी हैं और अचलेश्वर भी हैं

विधायक श्री पाठक ने अपनी फेसबुक पोस्ट में आगे लिखा है कि

#Fathers_day पर पिताजी के लिए ये कविता समर्पित हैं हालाँकि मेरे लिए जीवन का प्रत्येक पल पिता दिवस ही है । पिता को शब्दों में पिरोना मेरे लिए संभव नहीं है फिर भी हृदय की कलम से कुछ लिखने का प्रयास किया है ।जनप्रतिनिधि बनने के बाद स्वयं के लिए परिवार के लिए समय निकालना बहुत ही कठिन कार्य होता है, लगभग असंभव जैसा ही होता है काफ़ी दिन बाद मैंने अपने पुराने स्वरूप के कुछ पल अपने स्वयं के लिए बिताए, काफ़ी सुकून महसूस हुआ ।

#Happy_Fathers_day

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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