अंबेडकर जयंती पर तोहफा, MP की जेलों में बंद 154 बंदियों को मिली रिहाई, दिलाई ये प्रतिज्ञा

अंबेडकर जयंती पर तोहफा, MP की जेलों में बंद 154 बंदियों को मिली रिहाई, दिलाई ये प्रतिज्ञा

Release of prisoners in MP on Ambedkar Jayanti : पूरा देश आज भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती मना रहा है, इस विशेष मौके पर मध्य प्रदेश सरकार ने अच्छा कदम उठाया है , शासन के फैसले के बाद अज मध्यप्रदेश की विभिन्न केंद्रीय जेलों में बंद 154 बंदियों को रिहा किया गया, रिहा किये गए बंदियों में 5 महिला बंदी भी शामिल हैं।

ग्वालियर सेन्ट्रल जेल से 22 बंदी रिहा 

ग्वालियर सेन्ट्रल जेल अधीक्षक विदित सिरवैया  ने बताया कि इस विशेष अवसर पर ग्वालियर सेन्ट्रल जेल से भी 22 बंदियों को रिहा किया गया है। यह कैदी 14 से लेकर 20 साल तक की सजा काट चुके हैं। यह सभी हत्या के आरोप में सजा भुगत थे। जेल प्रशासन ने इन्हें जेल में बिताए गए दिनों के दौरान विभिन्न कार्यों से अर्जित उनके पारिश्रमिक और जेल से रिहा होने का प्रमाणपत्र प्रदान किया।

बंदियों ने रिहाई पर लिया ये संकल्प 

अपनी रिहाई पर बंदियों ने खुशी जाहिर की है और कहा है कि वह अब समाज की मुख्यधारा में आकर लोगों की भलाई के लिए काम करेंगे और अपने परिवार का भरण पोषण करेंगे। बंदियों ने संकल्प लिया कि वे कभी नशा नहीं करेंगे, समाज में अच्छे आचरण का उदाहरण पेश करेंगे और एक अच्छा नागरिक बनकर शेष जीवन बिताएंगे।

जेल परिसर में हुआ विशेष कार्यक्रम 

ग्वालियर सेन्ट्रल जेल परिसर में मुख्य हॉल में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर आज एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जेल अधिकारियों सहित बंदियों ने बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण किया, बंदियों के ऑर्केस्ट्रा ने देशभक्ति गीत और बाबा साहब पर बनाये गीत प्रस्तुत किये।

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ग्वालियर से अतुल सक्सेना की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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