विधायक ने जिनके लिए दिया धरना, प्रशासन ने HC की आड़ में किया बेदखल

विधायक ने जिनके लिए दिया धरना, प्रशासन ने HC की आड़ में किया बेदखल

ग्वालियर। शहर की सिरोल पहाड़िया पर वर्षों से अतिक्रमण कर रह रहे परिवारों को जिला प्रशासन नेआज छुट्टी के दिन बेदखल कर दिया। दिनभर चली कार्रवाई में प्रशासनिक अमले ने सभी 77 परिवारों को यहां से हटा दिया। गौरतलब है कि विधायक मुन्ना लाल गोयल इं लोगों को पट्टे दिए जाने की मांग को लेकर शनिवार को विधानसभा बाहर धरने पर भी बैठे थे। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश को आधार बताकर इन्हें यहां से हटा दिया।

गौरतलब है कि शहर की सिरोल पहाड़िया पर बीते लंबे अरसे से लोग अतिक्रमण कर मकान बनाकर रह रहे हैं। धीरे धीरे यहां। 77 परिवार पहुंच गए। कुछ दिन पहले हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में इसके खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई। जिसके बाद कोर्ट ने इसे हटाने केआदेश जिला प्रशासन को दिए। पिछले दिनों जिला प्रशासन ने इन्हें हटाने का प्रयास किया था तो स्थानीय विधायक मुन्ना लाल गोयल ने विरोध कर इसे रुकवा दिया था। उनकी मांग थी कि ये लोग कई वर्षों से यहां रह रहे हैं इनके लिए विस्थापन की व्यवस्था की जाए और इन्हें स्थाई पट्टे दिए जाएं। उन्होंने इसी मांग सहित अन्य मांगों के साथ कल शनिवार को भोपाल में विधानसभा परिसर में गांधीजी की प्रतिमा के नीचे एक घंटे का धरना भी दिया था। उधर विधायक का धरना खत्म हुआ कि शनिवार की रात को जिला प्रशासन का अमलाअतिक्रमण हटाने रात को ही पहुंच गया लेकिन रात अधिक होने और सर्दी के चलते वो लौट आया और फिर आज छुट्टी वाले दिन रविवार को प्रशासन की टीम एस डी एम अनिल बनवारिया के नेतृत्व में सिरौल पहाड़ी पर पहुंची और सभी 77 परिवारों को बेदखल कर दिया। एस डी एम का कहना था कि हमें सोमवार को हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी है इसलिए हमने अतिक्रमण हटाए हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि हमने सर्दी को देखते हुए बहुत से लोगों को नगर निगम ने रहने के लिए जगह दी है। वहीं कुछ लोग किराए के घरों में चले गए हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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