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ग्वालियर सेन्ट्रल जेल अधीक्षक के आरोपों को पूर्व बंदी ने नकारा, एसपी से की शिकायत, सीएम डॉ मोहन यादव से की ये मांग

Written by:Atul Saxena
Published:
पूर्व बंदी ऋषिपाल सिंह बघेल ने दावा किया कि जेल में बीड़ी सिगरेट, नशीला सामान, मुलाकात के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होता है पूर्व बंदी ने दावा कि जेल में 10 हजार रुपये से लेकर लाखों रुपये तक वसूले जाते हैं जितना ज्यादा पैसा उतनी अधिक सुविधाएँ मिलती हैं।
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ग्वालियर सेन्ट्रल जेल अधीक्षक के आरोपों को पूर्व बंदी ने नकारा, एसपी से की शिकायत, सीएम डॉ मोहन यादव से की ये मांग

Former Gwalior Central Jail Prisoner denies allegations

ग्वालियर सेन्ट्रल जेल के कथित वायरल वसूली वीडियो और अधीक्षक को ब्लैक मेल करने के लिए भेजे व्हाट्स एप मैसेज वाले मामले में नया मोड़ आ गया है, अधीक्षक विदित सरवैया ने सोमवार को घटना के लिए निलंबित जेल प्रहरी पवन शर्मा और पूर्व बंदी ऋषिपाल सिंह बघेल पर आरोप लगाये थे लेकिन आज ऋषिपाल सिंह बघेल खुद एसपी ऑफिस पहुंच गया और आरोपों को नकार कर जेल अधीक्षक पर ही उसे ब्लैक मेल करने के आरोप लगा दिए।

राज्य शासन ने ग्वालियर सेन्ट्रल जेल के अधीक्षक (प्रभारी) विदित सरवैया का तबादला कर उन्हें शिवपुरी जेल भेज दिया है, हालाँकि जेल विभाग के तबादला सूची में कई अन्य अधीक्षकों के भी नाम हैं लेकिन विदित सरवैया के ट्रांसफर के बारे में चर्चा है कि उन्हें सेन्ट्रल जेल में भ्रष्टाचार की शिकायतों के आधार पर हटाया गया है, ये दावा किसी और ने नहीं उसी पूर्व बंदी ऋषिपाल सिंह बघेल ने किया है जिस पर अधीक्षक विदित सरवैया ने ब्लैक मेल करने के आरोप लगाये हैं।

दरअसल सोमवार को सेन्ट्रल जेल अधीक्षक विदित सरवैया ने पुलिस में शिकायत की कि कोई उन्हें ब्लैक मेल कर रहा है उसने कथित तौर पर जेल के अन्दर वसूली के वीडियो बनाकर वायरल किये फिर उन्हें व्हाट्स एप मैसेज कर ब्लैक मेल करने की कोशिश की, उन्होंने आरोप लगाया ये काम एक निलंबित प्रहरी पवन शर्मा और पूर्व बंदी ऋषिपाल सिंह बघेल ने किया है, पुलिस ने शिकायत लेकर जाँच की बात कही।

मामला मीडिया में आया तो आज मंगलवार को पूर्व बंदी ऋषिपाल सिंह बघेल एसपी ऑफिस पहुंच गया, उसने एसपी धर्मवीर सिंह को एक आवेदन दिया और जेल अधीक्षक विदित सरवैया द्वारा उसपर लगाये गए आरोपों को नकार दिया इतना ही नहीं उसने उन पर ही उसे ब्लैक मेल करने के आरोप लगा दिया, बघेल ने कहा ये पूरा मामला उसके द्वारा जेल मंत्रालय में की गई जेल अधीक्षक की शिकायत के बाद चल रही जाँच को भटकाने और मुझपर दबाव बनाने का है।

पूर्व बंदी का दावा जेल में होती है लाखों की वसूली 

ऋषिपाल ने कहा मैं जब न्यायालय से बरी होकर जेल से छूटा तो मैंने जेल में होने वाले भ्रष्टाचार, बंदियों के साथ मारपीट, अवैध वसूली के खिलाफ आवाज उठाई, उसने दावा किया कि जेल में बीड़ी सिगरेट, नशीला सामान, मुलाकात के नाम पर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होता है पूर्व बंदी ने दावा कि जेल में 10 हजार रुपये से लेकर लाखों रुपये तक वसूले जाते हैं जितना ज्यादा पैसा उतनी अधिक सुविधाएँ मिलती हैं।

जेल अधीक्षक पर गंभीर आरोप 

उसने दावा किया कि इन कारगुजारियों की शिकायत उसने जेल से छूटने के बाद जेल विभाग के आला अधिकारियों से की, जिसपर जाँच के आदेश हुए लेकिन जेल अधीक्षक सरवैया ने उस जाँच को दबवा दिया, मैंने इसका विरोध किया और फिर शिकायत की तो कलेक्टर ग्वालियर को इस मामले में जाँच के आदेश हुए, मैंने भी मुख्यमंत्री को अलग से शिकायत भेजी और सबूत प्रस्तुत किये भोपाल गया विभाग के अधिकारियों से मिला।

पूर्व बंदी ने लगाये उसे ब्लैक मेल करने के आरोप 

बघेल ने कहा ये सब होने के बाद जेल अधीक्षक सरवैया को मालूम चल गया कि मेरी शिकायत पर नोटशीट बन गई है उनका तबादला निश्चित है इसलिए उसे रुकवाने के लिए उन्होंने ये काम किया और मेरा नाम लिया, उसने कहा कि जिस नंबर से जेल अधीक्षक को व्हाट्स एप मैसेज भेजे गए उस नम्बर से उसका कोई लेना देना नहीं है वो उसका नंबर है ही नहीं, बघेल ने कहा मेरे ऊपर लगे आरोप बे बुनियाद हैं उलटा वे ही मुझ पर दबाव बना रहे हैं और शिकायत वापस लेने के लिए ब्लैक मेल कर रहे हैं।

शिवपुरी किया गया तबादला रद्द करने की मांग 

बघेल ने जेल अधीक्षक विदित सरवैया को भ्रष्ट अधिकारी बताते हुए शासन को धन्यवाद देते हुए कहा कि मेरी शिकायत पर उनका ट्रांसफर तो कर दिया लेकिन उसने शिवपुरी भेजे जाने का विरोध किया, उसने कहा मैं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से निवेदन करता हूँ कि विदित सरवैया को तब तक कोई जेल नहीं दी जाये जब तक उनके खिलाफ जाँच चल रही है, बघेल ने कहा मैंने एसपी को सभी प्रमाण दिए हैं उन्होंने भी जाँच का भरोसा दिया है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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