मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार, 16 जून 2026 को कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई जिसमें कई अहम फैसलों को स्वीकृति मिली। इसी के साथ बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र में भी मोहन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर और बढ़ोत्तरी के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित करने की मंजूरी दे दी है।
मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जो 20 बिस्तर के ऊपर के हैं उनके डॉक्टरों और स्टाफ की कमी देखी गई है। जैसे विशेषज्ञ डॉक्टर मिलना चाहिए, वे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध नहीं हैं। मंत्री काश्यप ने बताया कि इस संबंध में सरकार द्वारा एक निर्णय लिया गया है कि तीन जिलों रीवा, देवास और गुना में 18 सामुदायिक केंद्रों को निजी तौर संचालन करने के लिए दिया जाएगा।
पहले चरण में 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का चयन
मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि नई नीति के तहत पहले चरण में 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को रखा गया है। इस प्रोजेक्ट के संपत्ति, दवाईंयां सरकार उपलब्ध कराएगी वहीं पीपीपी मॉडल के तहत डॉक्टर, विशेषज्ञ और स्टाफ समेत निजि व्यक्ति पूरा संसाधन लाएंगे। उन्होंने बताया कि इसमें टेंडर की प्रक्रिया रहेगी जो कम से कम लागत, अच्छी गुणवत्ता का रिकॉर्ड रहेगा उन्हें पहले प्रोजेक्ट के रूप में इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दिए जाएंगे।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि 5 ऐसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे जहां एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों में पीपीपी मॉडल लाना बेहद ही जरूरी था। जिससे प्रदेश की जनता को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं, अच्छे स्तर पर प्राप्त हो। इसलिए इस मॉडल को लागू करने की स्वीकृति दी गई है। इसके लिए पांच मंत्रियों की समिति नीति तैयार करेगी। इन अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार की सुविधा भी उपलब्ध होगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना भी आसान हो जाएगा।





