वाहन चालकों को गर्मी से राहत देने ग्वालियर जिला प्रशासन की पहल, दोपहर में ब्लिंकर मोड पर चल रहे ट्रैफिक सिग्नल

ग्वालियर में दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक ट्रैफिक सिग्नल को ब्लिंकर मोड पर चलाने का निर्णय लिया गया है, प्रशासन ने इसकी शुरुआत 1 मई से कर दी है, फिलहाल ये पांच चौराहों पर व्यवस्था शुरू की गई है। 
Gwalior traffic signals on blinker mode

Gwalior traffic signals on blinker mode

मध्य प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, अधिकांश जिलों में लू चल रही है, गर्म हवाओं से जनजीवन अस्त व्यस्त है, लोग दिन में बाहर निकलने से बच रहे हैं अधिकांश समय कूलर एसी में रहना चाहते हैं लेकिन नौकरी पेशा और रोज मजदूरी कर परिवार पालने वाले लोग गर्मी को झेलने पर मजबूर हैं।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा है, दोपहर में तेज गर्मी के चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है जो दो पहिया वाहन से निकलते हैं क्योंकि इतनी भीषण गर्मी और तेज धूप में उन्हें ट्रैफिक सिग्नल पर रुकना पड़ता है लेकिन ग्वालियर जिला प्रशासन ने वाहन चालकों के लिए एक मानवीय पहल की है।

12 बजे से 5 बजे तक ब्लिंकर मोड पर चल रहे ट्रैफिक सिग्नल 

स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक पुलिस ने पहल करते हुए वाहन चालकों को तेज गर्मी से बचाने के लिए दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक ट्रैफिक सिग्नल को ब्लिंकर मोड पर चलाने का निर्णय लिया है, प्रशासन ने इसकी शुरुआत 1 मई से कर दी है, फिलहाल ये पांच चौराहों पर व्यवस्था शुरू की गई है।

ट्रैफिक पुलिस ने की यातायात नियमों का पालन करने की अपील 

ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों ने इस परेशानी को समझा और स्मार्ट सिटी से बात कर सिग्नल संचालित करने वाली एजेंसी के माध्यम से दोपहर में 12 बजे से शाम 5 बजे तक ट्रैफिक सिग्नल थ्रू यानि ब्लिंकर मोड पर चलाने की व्यवस्था की है। ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों ने ब्लिंकर मोड के दौरान भी यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है।

इन पांच प्रमुख चौराहों पर ब्लिंकर मोड पर ट्रैफिक सिग्नल 

  • नदी गेट
  • कटोराताल
  • पिंटो पार्क
  • यूनीपेच फैक्ट्री
  • ब्रिगेडियर तिराहा
Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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