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ग्वालियर हाईकोर्ट: ‘यथास्थिति’ के आदेश के बावजूद बेच दी विवादित जमीन, अब तहसीलदार पर भी अवमानना का शिकंजा

Written by:Ankita Chourdia
Published:
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में एक गंभीर अवमानना का मामला सामने आया है। कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के बावजूद एक विवादित जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। अब याचिकाकर्ता ने तहसीलदार को भी मामले में पक्षकार बनाने की मांग की है।
ग्वालियर हाईकोर्ट: ‘यथास्थिति’ के आदेश के बावजूद बेच दी विवादित जमीन, अब तहसीलदार पर भी अवमानना का शिकंजा

Gwalior HC

ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में न्यायालय की अवमानना का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कोर्ट द्वारा दिए गए ‘यथास्थिति’ (Status Quo) के स्पष्ट आदेश के बावजूद प्रतिवादी ने विवादित जमीन की रजिस्ट्री कर दी। इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए डबरा के तहसीलदार को भी पक्षकार बनाने की मांग की गई है।

यह पूरा मामला अवमानना याचिका क्रमांक 2106/2025, सरोज देवी बनाम मणिराम से जुड़ा है। इसमें अब एक नया मोड़ आ गया है, जिससे प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

क्या था हाईकोर्ट का आदेश?

याचिका के अनुसार, हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2023 को एक आदेश पारित किया था। इस आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया था कि मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित संपत्ति पर दोनों पक्ष यथास्थिति बनाए रखेंगे। इसका मतलब था कि संपत्ति की प्रकृति, स्वामित्व या कब्जे में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता था।

आदेश की अवहेलना कर हुई रजिस्ट्री

याचिकाकर्ता का आरोप है कि प्रतिवादी मणिराम ने हाईकोर्ट के इस आदेश की जानबूझकर अवहेलना की। आरोप के मुताबिक, 15 मार्च 2025 को विवादित भूमि का बिक्री विलेख (सेल डीड) निष्पादित कर दिया गया। याचिका में इसे सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना बताया गया है। इतना ही नहीं, जिन लोगों के नाम पर यह रजिस्ट्री हुई है, वे अब पूरी जमीन पर फसल काट रहे हैं, जिससे कोर्ट का आदेश व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी हो गया है।

तहसीलदार की भूमिका पर उठे सवाल

मामले में प्रशासनिक भूमिका को भी कटघरे में खड़ा किया गया है। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति के साथ तहसीलदार डबरा के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया था। लेकिन, तहसीलदार दिव्यदर्शन शर्मा ने इस पर संज्ञान लेने के बजाय 4 सितंबर 2025 को आवेदन को निरस्त कर दिया।

याचिका में कहा गया है कि तहसीलदार का यह कदम हाईकोर्ट के अंतरिम निर्देशों के पूरी तरह से प्रतिकूल था और इसने अवमानना की स्थिति को बढ़ावा दिया। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में एक अलग आवेदन दायर कर तहसीलदार दिव्यदर्शन शर्मा को अवमानना मामले में प्रतिवादी क्रमांक-2 बनाने की प्रार्थना की है।

फिलहाल यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। आगामी सुनवाई में यह तय होगा कि न्यायालय इस अवमानना को कितना गंभीर मानता है और इस मामले में प्रशासनिक भूमिका पर क्या रुख अपनाता है।