Gwalior News : 6 साल पुराने हत्याकांड के 7 आरोपियों आजीवन कारावास

Gwalior News : 6 साल पुराने हत्याकांड के 7 आरोपियों आजीवन कारावास

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। ग्वालियर जिला न्यायालय (Gwalior District Court ) ने आज 6 साल पहले हुए हत्याकांड के 7 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश ने आजीवन कारावास के साथ आरोपियों को अलग अलग धाराओं में सजा सुनाई है और अर्थदंड से दण्डित किया है

शासकीय अधिवक्ता सचिन अग्रवाल ने बताया कि द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश संजय गोयल की अदालत ने आज 7 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। गोला का मंदिर थाना क्षेत्र में रहने वाले लाल सिंह 14 फरवरी 2016 को अपने दो बेटों मंगल सिंह और शंकर सिंह के साथ एक कार्यक्रम में जा रहे थे।

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रास्ते में गोले का मंदिर थाना क्षेत्र की प्रीतम विहार कॉलोनी में उपरोक्त हथियारबंद लोगों ने उनपर हमला कर दिया , लाल सिंह से उनकी 12 बोर की लाइसेंसी छीन ली और फिर देसी कट्टों से उनके पुत्र शंकर सिंह पर फायरिंग कर दी जिसमें शंकर सिंह की मौके पर मौत हो गई थी।

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अपर सत्र न्यायधीश संजय गोयल ने इस मामले में आरोपी देशराज गुर्जर, रवि गुर्जर, सोनू राजावत, रामू गुर्जर, दीपेंद्र गुर्जर, आशीष राठौर और सुनील गुर्जर को आजीवन कारावास सुनाई। न्यायाधीश ने आरोपियों को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 2 हजार रुपये जुर्माना, धारा 395 के तहत 10 साल की सजा और 1 हजार रुपये जुर्माना, धारा 397 के तहत 7 साल की सजा और 1 हजार रुपये जुर्माना, धारा 148 के तहत 1 साल की सजा और 500 रुपये जुर्माना और 25 आर्म्स एक्ट के तहत 2 साल की सजा और 500 रुपये का जुर्माना लगाया है।

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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