नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने की उम्मीद लेकर कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्र वर्षों से परीक्षा और रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। तीन साल का GNM कोर्स छह साल और चार साल का BSc नर्सिंग कोर्स सात साल तक खिंचने का आरोप लगाते हुए छात्रों ने मंगलवार को ग्वालियर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस दौरान एक नर्सिंग छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाना पड़ा।
छात्र पिछले छह दिनों से कटोरा ताल स्थित फ्लैग पॉइंट पर ‘नर्सिंग का जंतर-मंतर’ नाम से अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं। मंगलवार को BSc और GNM नर्सिंग के छात्र अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। बिना अनुमति प्रदर्शन करने को लेकर प्रशासन की चेतावनी से छात्र नाराज हो गए और कलेक्ट्रेट परिसर में ही नारेबाजी शुरू कर दी।
प्रदर्शन के दौरान BSc नर्सिंग की छात्रा आरती की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद एम्बुलेंस बुलाने की बात कही। छात्रों का आरोप है कि एम्बुलेंस आने में देरी हुई, जिसके बाद NSUI जिलाध्यक्ष पवन छात्रा को अपनी निजी कार से अस्पताल लेकर गए। घटना के बाद प्रदर्शन और तेज हो गया तथा विश्वविद्यालय थाना पुलिस को मौके पर स्थिति संभालनी पड़ी।
तीन साल का कोर्स छह साल, चार साल का सात साल तक खिंचने का आरोप
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनकी समस्या केवल एक परीक्षा या रिजल्ट तक सीमित नहीं है। GNM का तीन साल का कोर्स छह साल में भी पूरा नहीं हो पा रहा, जबकि BSc नर्सिंग का चार साल का कोर्स सात साल तक खिंच चुका है। छात्रों के मुताबिक BSc नर्सिंग के 2020, 2021 और 2022 तथा GNM के 2021 और 2022 सत्र की परीक्षाओं और परिणामों को लेकर लंबे समय से परेशानी बनी हुई है।
छात्रों ने परीक्षा और लंबित परिणाम जल्द जारी करने, पात्र छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने और कॉलेजों की कथित लापरवाही के कारण जिन विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप अटकी है, उनकी फीस माफ करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही कटोरा ताल फ्लैग पॉइंट पर शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने के लिए प्रशासनिक अनुमति की मांग भी की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बढ़ी चिंता
छात्रों की चिंता नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद और बढ़ी है। छात्रों का कहना है कि जिन कॉलेजों को जांच में उपयुक्तता नहीं मिलती, वहां परीक्षा कराने को लेकर पैदा हुई स्थिति का असर आखिर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है। ऐसे कॉलेजों के विद्यार्थियों की परीक्षा दूसरे संस्थानों में कराने की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई है।
प्रदर्शनकारी छात्राओं शालिनी और प्रियांशी का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ परीक्षा और रिजल्ट की नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार और भविष्य की सुरक्षा की है। छात्रों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म कर परीक्षाओं और परिणामों को लेकर स्पष्ट समय-सारणी जारी की जाए।






