मामूली विवाद में लोहे का सरिया मारकर हत्या, फरार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया

पुलिस ने मुखबिर तंत्र को मजबूत किया और उसे सफलता मिली, आरोपियों की मौजूदगी की सूचना पर पुलिस ने दबोच लिया अब गिरफ्तार आरोपियों का पुराना रिकॉर्ड चैक कर रही है।
Gola Ka Mandir Police Station Gwalior

Gola Ka Mandir Police Station Gwalior

ग्वालियर में भूसा खरीदने के विवाद में हुई मारपीट के बाद घायल युवक की मौत के मामले में पुलिस ने फरार दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, आरोपी घटना के बाद से ही फरार थे, पुलिस उनकी लगातार तलाश कर रही थी, पुलिस को मुखबिर की सूचना आरोपियों की मौजूदगी का पता चला और फिर पुलिस ने आरोपियों को दबोच लिया।

घटना 23 मई की है जब भूसे की टाल पर भूसा लेने गए ब्रजराज पवैया नामक युवक के साथ वहां मौजूद तीन लोगों ने मारपीट कर दी और सिर पर लोहे के सरिये से चोट पहुंचाई, और फरार हो गए बाद में इलाज के दौरान घायल ब्रजराज की मौत हो गई थी, तभी से पुलिस आरोपियों को तलाश रही थी।

भूसे की टाल पर मामूली विवाद में प्राणघातक हमला 

एडिशनल एसपी सुजावल जग्गा ने बताया कि 23 मई को घटना के समय मृतक ब्रजराज पवैया का भाई छत्रपाल भी मौजूद था उसने घटना के बाद गोला का मंदिर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी और फिर पुलिस ने घायल को अस्पताल में भर्ती कराया था, छत्रपाल के मुताबिक भूसे की टाल पर लिंगा गुर्जर, दीपा गुर्जर एवं काके श्रीवास आये और उन दोनों को गालियां देने लगे।

मुखबिर की मदद से दो आरोपी गिरफ्तार 

जब ब्रजराज ने गाली देने से रोका तो विवाद बढ़ गया, इतने में दीपा एवं काके ने ब्रजराज को पकड़ लिया और लिंगा ने दुकान पर रखा लोहे का सरिया उठाकर ब्रजराज के सिर में मारा जिससे वो लहुलुहान होकर गिर पड़ा और आरोपी भाग गए, ब्रजराज को अस्पताल में भर्ती कराया जहाँ इलाज के दौरान  सात दिन बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से मालूम चला कि दो आरोपी लिंगा गुर्जर और दीपा गुर्जर, मेला ग्राउंड में राजबाग गार्डन के सामने खडे हुए है। गोला का मंदिर पुलिस तत्काल एक्टिव हुई और आरोपियों को दबोच लिया।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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