ग्वालियर में बंद का नहीं दिखा असर, पुलिस ने रखी चप्पे चप्पे पर नजर

ग्वालियर में बंद का नहीं दिखा असर, पुलिस ने रखी चप्पे चप्पे पर नजर

ग्वालियर। अतुल सक्सेना।

CAA, NRC और NPR के विरोध में आयोजित ग्वालियर बंद का असर मिला जुला देखने को मिला। शहर में दुकानें खुली रहीं, आवागमन के साधन सुचारु रूप से चलते रहे। इस दौरान पुलिस चप्पे चप्पे पर नजर रखे हुई थी।

बहुजन क्रांति मोर्चा के बैनर पर आयोजित ग्वालियर बंद में एक दर्जन से ज्यादा संगठनों के शामिल होने का दावा किया गया था लेकिन अधिकांश संगठनों ने इस दावे को खारिज कर दिया जिसका असर ये हुआ कि बंद प्रभावी नहीं रहा। हालांकि पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए हुए थे। शहर के चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात थी। सोशल मीडिया पर आयोजकों। द्वारा फूलबाग चौराहे पर इकट्ठा होने की अपील के चलते फूलबाग चौराहे पर दो आईपीएस अधिकारी तीन। डीएसपी 13 इंस्पेक्टर और सवा सौ जवान सुबह से तैनात थे। पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन ने सख्त हिदायत दी थी कि कोई भी कानून का उल्लंघन करते पाया गया तो उसके खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाए। आयोजकों से भी कहा गया था कि वो अपना विरोध शांति पूर्ण तरीके से करे। जिसका परिणाम ये हुआ कि बंद शांतिपूर्ण रहा।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews