रात में युवक का अपहरण किया, मारपीट की फिर फेंक दिया नदी में, पुलिस ने बचाया

रात में युवक का अपहरण किया, मारपीट की फिर फेंक दिया नदी में, पुलिस ने बचाया

ग्वालियर, अतुल सक्सेना| जिले के डबरा थाना क्षेत्र में स्थित सिंध नदी में बीती रात एक युवक को कुछ लोगों ने फेंक दिया। युवक तैर कर जान बचाने की कोशिश कर रहा था। इसी बीच सूचना पर पहुंची डायल 100 के स्टाफ ने युवक को नदी से बाहर निकाला और सिविल अस्पताल ले गए जहाँ से उसे ग्वालियर रिफर कर दिया गया। युवक का इलाज जारी है।

ग्वालियर जिले के उटीला थाना क्षेत्र के जारगा गाँव में रहने वाले भारत जाटव ने बताया कि गाँव में हमारी रिश्तेदारी में शादी थी। कुछ लोग वहाँ भात देने आये थे। वहाँ मेरा भाई बंटी और उन लोगों में शराब पीने के दौरान विवाद हो गया। इसी दौरान उन लोगों ने 12 बोर की बन्दूक मेरे भाई बंटी पर तान दी। लेकिन वहाँ मौजूद रिश्तेदारों ने बीच बचाव कर मामला शांत करा दिया हमने भी पुलिस में रिपोर्ट नहीं की। लेकिन रात को करीब तीन बजे कुछ लोग आये और बंटी को उठा ले गए, उसके साथ मारपीट की और फिर उसे सिंध नदी के पुल से नदी में फेंक दिया। जिसे डायल 100 के स्टाफ़ ने बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया।

उधर डायल 100 पर तैनात आरक्षक ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि नदी में एक युवक जान बचाने की कोशिश कर रहा है। तो मौके पर पहुंचकर उसे बचाया, उसका शरीर नदी के ठंडे पानी के कारण ठिठुर गया था। उसके शरीर के तापमान को आग की मदद से सामान्य किया गया फिर डबरा सिविल अस्पताल ले गए । वहाँ युवक की गंभीर हालत देख कर डॉक्टर ने उसे ग्वालियर रिफर कर दिया गया। युवक का इलाज जारी है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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