एसपी ऑफिस में किन्नर का हंगामा, दूसरे किन्नरों पर लगाए मारने पीटने के आरोप

एसपी ऑफिस में किन्नर का हंगामा, दूसरे किन्नरों पर लगाए मारने पीटने के आरोप

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। ग्वालियर एसपी ऑफिस (Gwalior SP Office) में चल रही जान सुनवाई में उस समय लोग चौंक गए जब वहां पहुंचे एक किन्नर ने तालियां बजाना शुरू कर दी। अपनी शिकायत दर्ज कराने पहुंची किन्नर जोर जोर से चिल्लाकर दूसरे किन्नरों पर उसे मारने पीटने और उसकी बस्ती में बधाई नेग नहीं लेने की शिकायत करने लगी। पुलिस ने उसे शांत कराकर उसकी शिकायत सुनी और कार्रवाई का भरोसा दिया।

मंगलवार को एसपी ऑफिस में चल रही जनसुनवाई के दौरान काव्या नाम की किन्नर दूसरे ग्रुप की किन्नरों की शिकायत लेकर पहुंची, किन्नर काव्या ने जनसुनवाई में हंगामा (Gwalior Kinnar hangama) खड़ा करते हुए पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि थाने के पुलिस वाले उसकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। वो जनसुनवाई कक्ष में अफसरों के सामने ही तालियां बजाने लगी।

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वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर महिला कॉन्स्टेबल ने किन्नर काव्या को शांत (Gwalior transgender hangama) कराया। काव्या ने दो किन्नरों के नाम लेते हुए कहा कि वो लोग उसे उसकी बस्ती से बधाई, नेग नहीं लेने देते, उसे मारते पीटते हैं। काव्या किन्नर ने दूसरे ग्रुप के किन्नरों पर नकली किन्नर होने का भी आरोप लगाया।

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किन्नर काव्या ने कहा कि उसने कई बार पुलिस थाने में शिकायत की लेकिन पुलिस कोई मदद नहीं कर रही। पुलिस ने उसकी बात सुनने के बाद उसे भरोसा दिया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। एडिशनल एसपी अभिनव चौकसे ने कहा कि शिकायत की जांच के आदेश दे दिए हैं। डीएसपी स्तर के अधिकारी जांच करेंगे।

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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