Gwalior News : कोर्ट पेशी पर आये हत्या और हत्या के प्रयास के आरोपियों के साथ वकीलों ने की मारपीट, पुलिस ने मुश्किल से बचाया

Gwalior News : कोर्ट पेशी पर आये हत्या और हत्या के प्रयास के आरोपियों के साथ वकीलों ने की मारपीट, पुलिस ने मुश्किल से बचाया

Gwalior News : ग्वालियर में आज जिला न्यायालय परिसर के बाहर हंगामा हो गया, पुलिस ने शनिवार रविवार के दरमियानी रात हुई शिवांश शर्मा की हत्या और उसके भाई आयुष एवं उसके दोस्त वत्सल गर्ग की हत्या के प्रयास के तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, पुलिस जब आरोपियों को परिसर से बाहर वला रही थी तभी वकीलों ने आरोपियों के साथ झूमाझटकी और मारपीट शुरू कर दी, अचानक हुए इस घटनाक्रम से पुलिस घबरा गई और बड़ी मुश्किल से आरोपियों को बचाते हुए दौड़कर जीप में बैठाया और वहां से रवाना किया।

दरअसल शनिवार – रविवार की देर रात शिवांश शर्मा जब अपने दोस्त विवेक दीक्षित के साथ कटोराताल रोड पर चौपाटी पर गया था तो वहां मौजूद कुछ बदमाशों से उसका मोटरसाइकिल को लेकर कुछ  विवाद हो गया, बदमाशों ने इस विवाद में शिवांश पर चौकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, अचानक हुए हमले से घबराकर उसका दोस्त विवेक वहां से भाग निकला ।

विवेक ने शिवांश के भाई आयुष को घटना की जानकारी दी, आयुष अपने दोस्त वत्सल गर्ग के साथ वहां पहुंचे और भाई को बचाने लगे तो आरोपियों ने दोनों पर चाक़ू से हमला कर दिया जिसमें उन्हें भी गंभीर चोट आई, चाकू से हमला करने के बाद आरोपी भाग निकले , पुलिस ने घायलों को JAH में भर्ती कराया।

पुलिस ने आरोपियों की तलाश में टीमें लगाईं और तीन आरोपियों पुष्पेंद्र परिहार, नरसिंह और शेरू गुर्जर को  गिरफ्तार कर लिया, पुलिस ने आज सोमवार की शाम तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया और जब पुलिस तीनों को लेकर बाहर निकल रही थी वकीलों ने उनके साथ झूमा झटकी और मारपीट कर दी।

वकीलों की नाराजगी की वजह ये सामने आई कि घटना में घायल आयुष शर्मा और वत्सल गर्ग पेशे से वकील हैं, वकील इसी वजह से आक्रोशित थे और उन्होंने मौका देखकर आरोपियों के साथ मारपीट की, उधर सीएसपी अशोक सिंह जादौन ने कहा कि घटना में आरोपियों को कोई चोट नहीं आई है।

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ग्वालियर से अतुल सक्सेना की रिपोर्ट 

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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