लॉक डाउन पर चारों तरफ मुस्तैद अफसर, कहीं सख्ती तो कहीं निवेदन

लॉक डाउन पर चारों तरफ मुस्तैद अफसर, कहीं सख्ती तो कहीं निवेदन

ग्वालियर। अतुल सक्सेना।

कोरोना वायरस से जिले के लोगों को सुरक्षित रखने के लिये 22 से 24 मार्च तक जिले में लॉक डाउन घोषित किया गया है रविवार को जनता कर्फ्यू का लोगों ने पालन किया लेकिन सोमवार को सड़कों पर आवाजाही शुरू हो गई। जिसे देखते हैं प्रशासनिक और पुलिस अमला सड़कों पर मुस्तैद हो गया। इस दौरान कही सख्ती दिखाई दी तो कहीं नर्मी के साथ निवेदन।

शहर के व्यस्त चौराहों में से एक फूलबाग पर सुबह होते ही लोगों ने लॉक डाउन का उल्लंघन शुरू कर दिया। यहाँ तैनात ट्रैफ़िक पुलिस और पड़ाव थाने का स्ताफ लोगों को घर जाने के लिए कहने लगा । ज्यादातर लोग हाथ में डॉक्टर का पर्चा या बीमारी की बात कहकर मजबूरी बताने लगा। इस दौरान प्रतिबंध के बावजूद ऑटो चालक लॉक डाउन का उल्लंघन करते दिखाई दिये तो पुलिसकर्मियों ने उनकी गाड़ी के पहिये की हवा निकाल कर उन्हें एक तरफ खडा कर दिया। इसी दौरान राउंड पर निकले एसडीएम अनिल बनवारिया ने ऑटो वाले को सख्त लहजे में समझाया और ट्रैफ़िक पुलिसकर्मी को थाने ले जाकर 188 की कार्रवाई के निर्देश दिये। एसडीएम बनवारिया फिर चौराहे पर ही खड़े हो गए उन्होंने माइक हाथ में संभाला और सड़कों पर निकल रहे लोगों को घर में रहने की सलाह दी। इस दौरान कुछ लोग बहस करते भी दिखाई दिये जिन्हें ट्रैफ़िक पुलिसकर्मियों ने हाथ जोड़कर निवेदन किया कि आप भी सुरक्षित रहे और दूसरों को भी सुरक्षित रखें। एसडीएम अनिल बनवारिया के मुताबिक 22 से 24 मार्च तक लॉक डाउन घोषित है इसलिए लोगों को घर में ही रहने की सलाह दी जा रही है और यदि इस आदेश की अवहेलना करेगा तो उसके खिलाफ सख्ती की जायेगी।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews