फांसी पर लटका मिला विवाहिता का शव, परिजनों ने लगाये हत्या के आरोप, किया हंगामा

फांसी पर लटका मिला विवाहिता का शव, परिजनों ने लगाये हत्या के आरोप, किया हंगामा

Gwalior News : ग्वालियर की लक्ष्मीबाई कॉलोनी में उस समय हंगामा हो गया जब एक विवाहिता का शव फांसी पर लटका होने की सूचना बाहर आई, सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, महिला के मायके पक्ष के लोग भी पहुंचे। परिजनों ने पहुँचते ही शव को देखकर हंगामा शुरू कर दिया और ससुराल पक्ष पर दहेज़ मांगने, प्रताड़ित करने और हत्या के गंभीर आरोप लगाये।

पड़ाव थाना क्षेत्र में रहने वाले राकेश अग्रवाल के बेटे मेहुल अग्रवाल की पत्नी तृप्ति ने आज सुबह अपने कमरे में फंसी लगा ली, जब तक ससुराल वाले कुछ समझ पाते तब तक तृप्ति की मौत हो चुकी थी, उन्होंने शव को नीचे उतारा और परिजनों एवं पुलिस को सूचना दी।

अपनी बेटी की मौत की सूचना मिलते ही परिजन बदहवास वहां पहुंचे और चीख पुका र्शुरु हो गई, परिजनों ने आरोप लगाये कि उनके बेटी खुद फांसी पर नहीं लटकी बल्कि उसकी हत्या की गई है और लटकाया गया है, परिजनों ने आरोप लगाया कि तृप्ति के सास ससुर और पति मेहुल सब परेशान करते थे।

परिजनों ने कहा कि साढ़े साल पहले शादी हुई है तभी से दहेज़ के लिए परेशान करते थे, जब कभी भी मायके में छोड़ देते थे। आज सुबह भी बच्ची के साथ मारपीट हुई, उसके बाद उसकी हत्या कर शव फांसी पर लटका दिया, परिजनों ने पुलिस पर भी उनकी मदद नहीं करने के गंभीर आरोप लगाये।

उधर पुलिस ने पहुंचकर तफ्तीश शुरू की और फोरेंसिक एक्सपर्ट को बुलाकर जाँच पड़ताल की, पुलिस ने कहा कि शुरूआती जाँच में फांसी के फंदे पर लटकने से मौत दिखाई दे रही है, मृतका के गले पर निशान हैं। पुलिस ने शव को पीएम के लिए भेज दिया, उसका कहना है कि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के बाद ही कुछ स्पष्ट हो सकेगा।

ग्वालियर से अतुल सक्सेना की रिपोर्ट 

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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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