विधायक का सीएम शिवराज पर तंज- “क्या वो चाहते हैं कि लोग उन्हें कंस या शकुनि मामा की तरह याद रखें”

विधायक का सीएम शिवराज पर तंज- “क्या वो चाहते हैं कि लोग उन्हें कंस या शकुनि मामा की तरह याद रखें”

ग्वालियर/अतुल सक्सेना

12 की परीक्षा में अव्यवस्थाएँ देखने के बाद परेशान हुए ग्वालियर दक्षिण विधानसभा के कांग्रेस विधायक प्रवीण पाठक ने गांधी प्रतिमा के नीचे बैठकर शिवराज सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। विधायक ने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री चाहते हैं कि जनता उन्हें भविष्य में कंस या शकुनि मामा के नाम से याद रखे।

कोरोना महामारी में छात्रों जो जनरल प्रमोशन देने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जो दो बार पत्र लिख चुके ग्वालियर दक्षिण विधानसभा के कांग्रेस विधायक प्रवीण पाठक ने मुख्यमंत्री की हठधर्मिता के बाद मंगलवार को गांधी जी की प्रतिमा के नीचे बैठकर धरना दिया। इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस विधायक ने कहा कि पूरे मध्यप्रदेश के परीक्षा केंद्रों पर बच्चों को भेड़ बकरियों की तरह भरकर परीक्षा दिलवाई गई, जिसे देखकर और सुनकर ही मेरा मन कांप गया। लेकिन मुख्यमंत्री जी पर इसका कोई असर नहीं हुआ। विधायक ने कहा कि बच्चों को सरकार कोरोना की टेस्टिंग किट की तरह क्यों इस्तेमाल कर रही है। माता पिता सहमे हुए हैं, बच्चे जान हथेली पर लेकर परीक्षा देने जा रहे हैं। यदि बच्चों को जनरल प्रमोशन देने में कोई तकनीकी परेशानी है तो व्यवस्थाएँ प्रॉपर की जाये।

कांग्रेस विधायक ने कहा कि खुद को मामा कहलाने वाले शिवराज सिंह चौहान को सिर्फ चुनाव के समय ही भांजे भांजियों की याद आती है। क्या वे वास्तव में कंस मामा का स्वरूप हैं जो अपने भांजे भांजियों का ध्यान नहीं रख पा रहे हैं। क्या इतिहास एक बार फिर कंस और शकुनि मामा को दोहरा रहा है। क्या शिवराज जी चाहते हैं कि जनता उन्हें कंस या शकुनि मामा के रूप में याद रखे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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