विधायक का BJP पर तंज, राम हनुमान की पूजा पर रोक लेकिन भाजपा में आना है तो कोई बंदिश नहीं

विधायक का BJP पर तंज, राम हनुमान की पूजा पर रोक लेकिन भाजपा में आना है तो कोई बंदिश नहीं

ग्वालियर/अतुल सक्सेना

ग्वालियर दक्षिण विधानसभा के कांग्रेस विधायक प्रवीण पाठक (congress mla pravin pathak) ने भारतीय जनता पार्टी (bjp) पर तंज कसते हुए कहा है कि इसका चाल चरित्र और चेहरे अलग अलग हैं। ये राम नवमी और हनुमान जयंती पर जनता को पूजा करने से रोकती है लेकिन किसी को यदि अपनी पार्टी में जॉइन कराना हो तो किसी तरह की पाबंदी नहीं है। इसी के साथ उन्होने कहा कि बीजेपी सरकार कोरोना (corona) के साथ आई है कोरोना के साथ ही चली जाएगी।

कांग्रेस विधायक (congress mla) प्रवीण पाठक ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने देश और प्रदेश में तानाशाही मचा रखी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार में मृत्यु हो जाती है तो केवल 20 लोगों के शामिल होने की अनुमति है शादी में पांच लोगों की अनुमति है। राम नवमी में इस सरकार ने मंदिरों में पूजा नहीं करने दी, हनुमान जयंती पर मंदिरों में ताले डले रहे लेकिन आज जब इन्हें किसी को अपनी पार्टी जॉइन करानी है तो कोई नियम नहीं हैं, कोई पाबंदी नहीं है, कोई ताले कोई नियम कायदे नहीं हैं। यहाँ सेंकडो लोग आ सकते हैं। बैठकों में सोशल डिस्टेंसिंग (social distance) का पालन नहीं होता। विधायक पाठक ने कहा कि मैंने हमेशा ही कहा है कि भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरे में अंतर है। विधायक पाठक ने कहा कि भाजपा की इस सरकार ने कभी भी कोरोना जैसी महामारी को सीरियस नहीं लिया। उन्होंने दावा किया कि मप्र की ये सरकार कोरोना (corona) में आई है और कोरोना में ही चली जायेगी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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