अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई, एक पनडुब्बी नष्ट

अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई, एक पनडुब्बी नष्ट

डबरा /सलिल श्रीवास्तव। एक ओर पूरा देश कोरोना (Corona) जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहा है तो दूसरी ओर रेत माफिया अभी भी नदियों से अवैध रेत उत्खनन (illegal sand mining) करने में लगे हुए हैं। ताजा मामला भितरवार के लोहारी खदान के गोधारी घाट का है जहां अवैध रेत उत्खनन की शिकायत मिलने पर जब प्रशासन ने छापा मारा।

यहां तीन पनडुब्बियां चल रही थी जिनमें से एक पनडुब्बी को प्रशासन ने पकड़ लिया और उसे जेसीबी और आग लगाकर नष्ट किया गया पर प्रशासन की जानकारी लगते ही रेत माफिया दो पनडुब्बियों को भगा ले गए जिसमें से एक पनडुब्बी को नदी में डूबा दिया गया तो दूसरी पनडुब्बी को शिवपुरी जिले की सीमा में ले गए जहां भितरवार प्रशासन कार्यवाही करने में असमर्थ दिखा पूरी कार्यवाही भितरवार एसडीएम के के ग़ौर के साथ पुलिस प्रशासन ने संयुक्त रूप से अंजाम दी।

जब इस संबंध में भितरवार एसडीएम से बात की तो उनका साफ तौर पर कहना था कि अवैध उत्खनन की लगातार शिकायतें मिल रही थी जिस पर यह कार्रवाई की गई ग्वालियर में नहीं पर शिवपुरी जिले में बड़े पैमाने पर उत्खनन उत्खनन जारी है जिसकी सूचना शिवपूरी प्रशासन को उपलब्ध करा दी गई है। ।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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