एंबुलेंस में जा रहा था नर्सिंग होम स्टाफ, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां , पुलिस ने लिया एक्शन

एंबुलेंस में जा रहा था नर्सिंग होम स्टाफ, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियां , पुलिस ने लिया एक्शन

ग्वालियर। कोरोना से बचने के लिए लॉक डाउन का पालन करते हुए घर में रहना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भी है लेकिन कुछ लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। पुलिस ने इसी क्रम में एक एंबुलेंस के खिलाफ एक्शन लिया है।

दरअसल ग्वालियर पुलिस सड़क पर निकलने वाले वाहनों की जांच कर रही है। इसी दौरान पड़ाव थाना पुलिस को फूलबाग चौराहे पर एक एंबुलेंस मिली जिसमें मरीज नहीं था लेकिन लोग बैठे थे। जब पुलिस ने रोक कर पूछताछ की तो एंबुलेंस ड्राइवर संजय ने बताया कि ये गाड़ी माहेश्वरी नर्सिंग होम की है और इसमें यहीं का स्टाफ है जिसे छोड़ने जा रहे हैं । मारुति वैन में बनी एंबुलेंस में बैठे स्टाफ की जब गिनती की गई तो उसमें ड्राइवर सहित आठ लोग बैठे थे यानि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा था। जबकि नियमानुसार एक चार पहिया वाहन में दो व्यक्ति हो बैठे सकते हैं। पुलिस ने सभी को नीचे उतारा और कहा कि अपनी सुविधा से जाइये। पुलिस ने ड्राइवर को भी फटकार लगाई लेकिन उसका तर्क था कि सवारी वाहन नहीं चल रहे तो एंबुलेंस से ही स्टाफ आ जा रहा है। बाद में पुलिस ने सामान्य धाराओं के तहत जुर्माना करते हुए उसे छोड़ दिया। पुलिस का कहना है कि आज मेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की बहुत आवश्यकता है इसलिए छोड़ रहे हैं लेकिन ड्राइवर को बोल दिया है कि यदि एंबुलेंस से स्टाफ छोड़ना है तो दो लोगों से ज्यादा नहीं बैठेंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा जायेगा। वरना यदि फिर से नियम तोड़ा तो कड़ी कार्रवाई की जायेगी।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews