कमलनाथ के मंत्री का बयान, देश में है डर का माहौल

कमलनाथ के मंत्री का बयान, देश में है डर का माहौल

अतुल सक्सेना/ग्वालियर। दिल्ली में सोमवार को हुई आगजनी की घटना को लेकर प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बिना किसी पार्टी का नाम लिए कहा कि ये आग लगाई नहीं लगवाई गई है उन्होंने कहा कि आज देश में डर का माहौल है अपनी बेटियों को बाहर भेजने में सोचना पड़ता हैं।

CAA, NRC और NPR को लेकर दिल्ली सहित देश में कई जगह विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इसी दौरान सोमवार को दिल्ली में एक क्षेत्र में प्रदर्शन उग्र हो गया, यहाँ पत्थरबाजी होने लगी, शाहरुख नामक एक युवक पिस्टल लेकर फायर करने लगा। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और बलपूर्वक भीड़ को खदेड़। दिया। इसी बीच कुछ लोगों ने पेट्रोल पंप, वाहनों सहित कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम को प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने साजिश बताया है। ग्वालियर में पत्रकारों। से बात करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में आग लगाई नहीं गई बल्कि लगवाई गई है। हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि इसमें किसका हाथ है। मंत्री तोमर ने कहा कि आज देश का माहौल ऐसा हो गया है कि अपनी बेटियों को दिल्ली, अहमदाबाद या अन्य शहर में भेजने से पहले डर लगता है, सोचना पड़ता है कि कहीं दंगा ना भड़क जाए। उन्होंने कहा कि आज देश के सामने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं की जरूरत है। खाद्य मंत्री ने भारतीय जनता पार्टी सहित सभी दलों से अपील की कि हम सबको मिलकर देश के माहौल को अच्छा रखना होगा। उन्होंने इस मामले में राजनीति करने वालों की कड़े शब्दों में निंदा की।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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