लॉक डाउन में बंद हुआ शराब का प्रोडक्शन, अब यहाँ बन रहा ये

लॉक डाउन में बंद हुआ शराब का प्रोडक्शन, अब यहाँ बन रहा ये

ग्वालियर। कोरोना महामारी से बचने के लिए लोग सेनेटाइजर का उपयोग सबसे ज्यादा कर रहे हैं यही वजह है कि उसकी मांग अचानक बढ़ने से आपूर्ति कम हो गई। लेकिन प्रदेश सरकार के निर्देश पर मांग और आपूर्ति के इस अंतर को शराब फैक्ट्री ने कम कर दिया है। अब यहाँ शराब नहीं सेनेटाइजर बन रहा है।

ग्वालियर एल्कोब्रू प्राइवेट लिमिटेड यानि रायरू डिस्टलरी में शराब के अलग अलग ब्रांड बनते है और अलग अलग राज्यों में सप्लाई होते हैं लेकिन कोरोना महामारी के चलते आबकारी आयुक्त मप्र राजेश बहुगुणा के निर्देश पर इस फैक्ट्री में सेनेटाइजर का निर्माण हो रहा है। सरकार ने प्रदेश की शराब फैक्ट्रियों को शराब निर्माण बंद कर सेनेटाइजर बनाने के निर्देश दिया हैं। जानकारी के अनुसार ग्वालियर के रायरू में स्थित शराब फैक्ट्री में 20 मार्च से शराब का निर्माण बंद है और अब तक फैक्ट्री 4075पेटी हैंड सेनेटाइजर तैयार कर चुकी है। प्रत्येक पेटी में 180–180ML की 50 बोतल है इस तरह 36657 लीटर सेनेटाइजर 2,03,650 बोतलों में भरा जा चुका है। इनमें से 2हजार पेटियों को शासकीय गोदामों में भेजा जा चुका है बाकी का आदेश के इंतजार में रखा है। रायरू डिस्टलरी में तैयार सेनेटाइजर को पुलिस को और पंचायतों को मुफ्त दिया जा रहा है और मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों में मांग के हिसाब से पहुंचाया जा रहा है। फैक्ट्री प्रबंधन के मुताबिक उनके पास बड़ी मात्रा में सेनेटाइजर तैयार है लेकिन उसे पैक करने वाली बोतल और ढक्कन बनाने वाली फैक्ट्रियों से माल की सप्लाई नहीं हो रही इसलिए पैकिंग रुक गई है। प्रबंधन के मुताबिक उनके पास अच्छी क्वालिटी की स्प्रिट है जिसे DRDO ले रहा गई उधर पंजाब के भटिंडा से भी मांग आई है ।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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