शाहीन बाग के समर्थन में MP में धरना, प्रदर्शनकारी बोले-पहले 1971 के दस्तावेज दिखाये BJP

शाहीन बाग के समर्थन में MP में धरना, प्रदर्शनकारी बोले-पहले 1971 के दस्तावेज दिखाये BJP

ग्वालियर।अतुल सक्सेना। CAA और NRC के विरोध में शाहीन बाग दिल्ली में चल रहे धरने के समर्थन में ग्वालियर में भी महिलाओं ने धरना दिया । फूलबाग चौराहे के पास वामपंथी दलों की महिला विंग ने रविवार को धरना दिया। महिलाओं ने कहा कि हमारे वोट से चुनी सरकार आज हमसे हमारी पहचान पूछ रही है । हमसे 1971 से पहले के प्रमाण मांगे जा रहे हैं। हम कहते हैं पहले सत्ता में बैठी भाजपा अपनी पार्टी के प्रमाण दे फिर हमसे प्रमाण मांगे।

फूलबाग चौराहे के पास गांधी उद्यान के मुख्य द्वार पर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के बैनर तले संकल्प सभा के रूप में धरने का आयोजन किया गया। धरने में वाम दलों की सभी महिला विंग की सदस्य मौजूद थी। इनका साथ देने सभी धर्मों की महिलाएं शामिल थी। समिति की जिला अध्यक्ष रीना शाक्य ने कहा कि आज हमने 26 जनवरी का दिन इसलिए चुना है क्योंकि आज हमारा संविधान लागू हुआ था। जिसकी प्रस्तावना में कहा गया है कि “हम भारत के लोग ” लेकिन केंद्र की सरकार हमें जाति और धर्म के नाम पर बांटना चाहती है इसलिए CAA और NRC लाया जा आरहा है ये मुसलमानों से ज्यादा हिंदुओं को प्रभावित करेगा। जिला अध्यक्ष ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हमसे 1971 से पहले के दस्तावेज मांगे जा आरहे हैं लेकिन भाजपा की सरकार पहले अपनी पार्टी के 1971 से पहले के दस्तावेज दिखाये। महिलाओं ने कहा कि हम शाहीन बाग की महिलाओं के धरने का समर्थन करते हैं। यदि सरकार ने इस काले कानून को वापस नहीं लिया तो हैं धरने को और तेज करेंगे।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews