PWD ने डबरा में नाला निर्माण की दी थी अनुमति, एक साल बाद कर दी निरस्त, बताई ये वजह

PWD राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग ग्वालियर पर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उसने इतने वर्षों में सड़क का मरम्मत कार्य क्यों नहीं कराया, यदि मार्ग सही होता तो आज ये हालात नहीं बनते।
Dabra Nala Construction Dispute

Dabra Nala Construction Dispute

मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में बैठे अफसर विकास कार्यों को लेकर कितने गंभीर हैं इसकी एक बानगी ग्वालियर जिले के डबरा में देखने को मिली है, यहाँ की जनता सरकारी आदेशों के बीच पिस रही है, विकास कार्य तो जैसे सपना हो गया है, हर तरफ गन्दगी, बदहाली का आलम, हालात ऐसे हो चुके हैं कि कभी डबरा शुगर मिल (द ग्वालियर शुगर मिल कंपनी लिमिटेड) से देश विदेश में पहचान रखने रखने वाला डबरा आज अपने ही हाल पर रो रहा है…आइये हम आपको इस भूमिका के सन्दर्भ बताते हैं।

ग्वालियर जिले की डबरा तहसील जिले की सबसे समृद्ध तहसील है, यहाँ का किसान उन्नत खेती के लिए भी जाना जाता है सरकार को अच्छा राजस्व कमाकर देने वाला ये नगर इस सबके बावजूद विकास के मामले में पिछड़ा हुआ है, यहाँ एक नाला निकला हुआ है जो शहर के बीच से होकर गुजरता है, बहुत पुराना नाला होने के कारण और समय पर मेंटेनेंस नहीं होने के कारण ये जगह जगह से टूट चुका है, ओवर फ्लो होता है।

नाले से निकलने वाली गंदगी और बीमारी के भय से परेशान लोगों ने नगर पालिका में शिकायत की, काफी प्रयासों के बाद नगर पालिका ने नाला निर्माण की प्लानिंग की और इसके लिए लोक निर्माण विभाग संभाग क्रमांक एक ग्वालियर से अनुमति मांगी, 2025 में  लोक निर्माण विभाग ने नाला निर्माण की अनुमति दे दी, अनुमति के बाद सरकारी चाल की तरह काम शुरू हुआ लेकिन तय मानकों को दरकिनार कर मनमानी का निर्माण शुरू हो गया।

2025 में अनुमति दी 2026 में निरस्त कर दी 

नाला निर्माण के दौरान शिकायतें हुई तो इसके हस्तांतरण का मामला सामने आया, इसमें एक बिंदु सामने आया कि लोक निर्माण विभाग राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है इसे आधार बनाकर पीडब्ल्यूडी ने आदेश निकाला कि जिस मार्ग पर नाला निर्माण हो रहा है वो उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता इसलिए जो अनुमति दी गई थी वो निरस्त की जाती है, अर्थात जो अनुमति 2025 में दी गई थी उसे एक साल बाद 2026 में पीडब्ल्यूडी ने निरस्त कर दिया और नगर पालिका को लिखा कि आप संबंधित विभाग से ही अनुमति प्राप्त करें।

PWD पर उठ रहे ये दो बड़े सवाल 

यहाँ दो बड़े सवाल खड़े होते हैं पहला ये कि जिस मार्ग पर नाले का निर्माण होना प्रस्तावित था क्या लोक निर्माण विभाग संभाग क्रमांक एक ग्वालियर को इसकी जानकारी नहीं थी कि वो उसके अधिकार क्षेत्र में है कि नहीं, यानि कार्यपालन यंत्री ने बिना अधिकार वाले मार्ग पर नाला निर्माण की अनुमति दे दी, दूसरा ये कि जब वो मार्ग लोक निर्माण विभाग राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग ग्वालियर के अधीन आता है तो उसने उस मार्ग की मरम्मत इतने वर्षों में क्यों नहीं कराई?

बहरहाल शहर के यातायात को व्यवस्थित करने और जनता को गंदगी, बदबू, बीमारियों से बचाने का जो एक प्रयास जनता की शिकायतों के बाद नगर पालिका ने शुरू किया था वो खटाई में पड़ गया है, अब नए सिरे से नगर पालिका इसके लिए अनुमति लेने का प्रयास करेगी , देखना होगा कि वो इसके लिए कितनी जल्दी गंभीरता दिखाती है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews