
मध्य प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसियेशन और PWD के चीफ इंजीनियर एसएल सूर्यवंशी के बीच चल रहे शीत युद्ध के बीच नया मोड़ आ गया है, बीते दिनों मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ की एकल बैंच ने सूर्यवंशी का न्यायालय की अवमानना का दोषी माना था उसके बाद अब मुख्य अभियंता ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों पर एफआईआर करने के आवेदन को पुलिस से वापस ले लिया है।
दरअसल मध्य प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसियेशन और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता एसएल सूर्यवंशी के बीच झगड़े की मुख्य वजह एसोसियेशन का दशकों पुराने गोल घर स्थित कार्यालय है जो शासन के निर्देश पर नियमों का पालन करते हुए 1974 में उसे मिला था तभी से लेकर आज तक एसोसियेशन की बैठक इसमें होती हैं, लेकिन अभियंता सदन नाम के इस कार्यालय को वापस लेने के लिए सूर्यवंशी ने कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया और शासन को शिकायत की और इसे खाली कराने के निर्देश दिए।
CE की शिकायत झूठी, 1974 से MPDEA के पास है भवन
शिकायत की जाँच लोक निर्माण विभाग ने कार्यपालन यंत्री से कराई , मुख्य अभियंता पीसी वर्मा के हस्ताक्षर से 15 मार्च 2023 को प्रमुख अभियंता के नाम जारी पत्र में कहा गया कि जो शिकायतें की गई है और उसमें जो तथ्य दिए गए हैं वो तथ्यहीन हैं, जिस जमीन पर भू माफिया द्वारा कब्ज़ा किया जाना बताया गया है उक्त भूमि पर मध्य प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसियेशन का कार्यालय भवन है , ये भवन 21 जनवरी 1974 को संघ को दिया गया था, क्षेत्र में एक ब्रिज निर्माण के कारण व कोरोना काल में भवन जीर्णशीर्ण हो गया था उसकी मरम्मत संगठन ने स्वयं के व्यय से कराई है इसलिए शिकायत झूठी है।
शिकायतकर्ता ने कहा षड्यंत्र, हस्ताक्षर को बताया फर्जी
शासन से क्लीनचिट मिलने के बाद एसोसियेशन ने शिकायतकर्ता को तलाशा तो वो भाजपा के जिला उपाध्यक्ष कनवर किशोर मंगलानी निकले उन्होंने शिकायती पत्र देखते से ही कह दिया कि मेरे लैटर हैड का किसी ने गलत इस्तेमाल किया है ,दस्तखत भी मेरे नहीं हैं। फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर चीफ इंजीनियर की इस मंशा के खिलाफ संघ हाईकोर्ट गया जहाँ से 28 फरवरी को उसे स्थगन मिल गया।
शासकीय भवन को ध्वस्त करने, कब्ज़ा करने के लगाये थे आरोप
लेकिन कोर्ट के स्थगन आदेश का उल्लंघन करते हुए एसएल सूर्यवंशी ने पड़ाव पुलिस थाने में शिकायत कर दी, शिकायत में उन्होंने एसोसिएशन पर PWD की जमीन को ट्रस्ट में शामिल करने शासकीय भवन को ध्वस्त करने का आरोप लगाते हुए मुख्य ट्रस्टी राजेंद्र सिंह भदौरिया और अन्य के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का अनुरोध किया जिसमें उन्होंने 8 जुलाई और 21 जुलाई को शासन को भेजे पत्रों का भी हवाला दिया।
ग्वालियर HC ने माना है अवमानना का दोषी
हाई कोर्ट ने मुख्य अभियंता एसएल सूर्यवंशी के इस कृत्य पर कड़ी नाराजगी जताई , 30 जुलाई को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा चीफ इंजीनियर ने 28 फरवरी 2025 के अंतरिम आदेश का उल्लंघन करते हुए 8 जुलाई 2025 को एक पत्र जारी कर याचिकाकर्ताओं के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का पत्र जारी किया, फिर 29 जुलाई 2025 को स्पष्टीकरण दिया जिसमें पैरा-5 में मुख्य अभियंता ने बिना शर्त क्षमा याचना की थी, लेकिन बाद के पैराग्राफ में उन्होंने उक्त पत्र जारी करने के अपने रुख को सही ठहराने की कोशिश की थी और स्पष्टीकरण के साथ 21 जुलाई 2025 का एक और पत्र संलग्न किया। 8 जुलाई 2025 के पूर्व आदेश को चतुराई से संशोधित किया गया था और पुनः इंजीनियर वेलफेयर ट्रस्ट के ट्रस्टियों तथा ट्रस्ट के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। मुख्य अभियंता या ये कृत्य अवमानना की श्रेणी में आता है अतः कोर्ट एसएल सूर्यवंशी को अवमानना का दोषी मानता है।
CE एस एल सूर्यवंशी ने वापस ली पुलिस FIR
कोर्ट ने अवमानना का दोषी मानते हुए दंड निर्धारित करने के लिए 6 अगस्त की तारीख को सुनवाई नियत की है, इस बीच इस मामले की गूंज भोपाल तक पहुंच गई है, उधर मध्य प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसियेशन ने सूर्यवंशी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, संगठन में प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर सूर्यवंशी को ग्वालियर से हटाने की मांग की है, उन्होंने पत्र की कॉपी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और पी डब्ल्यू डी मंत्री राकेश सिंह को भी भेजी है , इस सबके बीच अब सूर्यवंशी का एक पत्र सामने आया है जो उसी दिन 30 जुलाई को जारी किया है जिस दिन उन्हें हाईकोर्ट ने अवमानना का दोषी माना है, उसमें उन्होंने कार्यपालन यंत्री को शिकायत वापस लेने का लेख किया है जिसके बाद कार्यपालन यंत्री ने 1 अगस्त को पड़ाव थाना प्रभारी को पत्र लिखकर शिकायत वापस लेने का अनुरोध किया है।




पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

