‘पुलिस से बचा लो साहब’, सब्जी विक्रेता महलाओं ने एसपी से लगाई गुहार

‘पुलिस से बचा लो साहब’,  सब्जी विक्रेता महलाओं ने एसपी से लगाई गुहार

ग्वालियर। अतुल सक्सेना| कोरोना संकट (Corona Crisis) के बीच जहाँ पुलिस सहयोगी की भूमिका में है वहीं हजीरा थाने की पुलिस (Police) पर सब्जी विक्रेता महिलाओं ने मारपीट करने और पैसे मांगने के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिलाओं ने आज एसपी ऑफिस पहुँचकर पुलिसकर्मियों की शिकायत की।

महिलाओं ने बताया कि वे सड़क पर ठेला लगाकर सब्जी बेचती हैं। लेकिन हजीरा थाने के पुलिसकर्मी आये दिन परेशान करते हैं। ये लोग तराजू बाँट ले जाते हैं, मुफ्त में सब्जी मांगते हैं, पैसों की मांग करते हैं और नहीं देने पर डंडे मारकर भगा देते हैं। परेशान महिलाओं ने आरोप लगाए कि जो पैसे दे देता है उसके ठेले लगने दिये जाते हैं और जो पैसे नहीं देता उसके साथ मारपीट की जाती है। महिलाओं ने कहा कि लॉक डाउन में काम धंधे बंद हैं पति घर पर बैठे हैं ऐसे में परिवार चलाने के लिए सब्जी बेच रहे हैं उसे भी पुलिस वाले नहीं बेचने दे रहे। हैं कहाँ जाये बच्चों को कैसे पालें, क्या उन्हें जहर दे दें? हमारी मदद करो साहब। उधर एसपी ऑफिस पहुंचे सीएसपी रवि भदौरिया ने महिलाओं का आवेदन लेने के बाद कहा कि कोरोना का संक्रमण चल रहा है इसलिए महिलाओं को नियमानुसार निर्धारित दूरी बनाये रखने और लॉक डाउन का पालन करने के लिए कहा गया है। ये महिलाएं हजीरा क्षेत्र में सब्जी के ठेले लगाती हैं। इनकी शिकायत ले ली है यदि जांच में कोई दोषी हुआ तो कार्रवाई की जायेगी।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews