कांग्रेस विधायक के बधाई संदेश में सिंधिया के फोटो पर मचा बवाल

कांग्रेस विधायक के बधाई संदेश में सिंधिया के फोटो पर मचा बवाल

ग्वालियर|अतुल सक्सेना| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशभर में कोरोना को हराने के लिए दीपक जलाने के अभियान का समर्थन कर सुर्खियो में आए ग्वालियर दक्षिण के कांग्रेस विधायक प्रवीण पाठक एक बार फिर चर्चा में है । दरअसल एक अखबार के दस साल पूरे होने पर दिया गया उनका विज्ञापन अंचल में चर्चा का विषय बन गया है । इस बधाई संदेश में समाचार पत्र को शुभकामनाएं देते हुए प्रवीण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 3 मई तक के लाकडाउन का आह्वान करने का पूर्ण निष्ठा से पालन करने और सोशल डिस्टेंस बनाए रहते हुए कोरोना का डटकर मुकाबला करने की अपील तो की ही है लेकिन बधाई संदेश के ठीक ऊपर अपना प्रेरणास्रोत स्वर्गीय माधवराव सिंधिया को बताया है ।

इस बधाई संदेश में स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के साथ-साथ कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी, प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी के भी चित्र है। प्रवीण पाठक से जब माधवराव सिंधिया का चित्र लगाने का सवाल और उन्हें अपना प्रेरणास्रोत बताने के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि स्वर्गीय माधवराव सिंधिया जीवन भर गांधी नेहरू परिवार के प्रति वफादारी और कांग्रेस के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के चलते भारतीय राजनीति में एक अलग मुकाम रखते थे और उनकी ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ छवि मेरे और मेरे जैसे लाखों कार्यकर्ताओं के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत है। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के बारे में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कुछ नहीं कहा और बोले कि मेरा मौन ही मेरा जवाब है।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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