स्वरा का प्रज्ञा पर अटैक- आतंक की आरोपी बन जाती है सांसद, सवाल पूछने वाला एंटीनेशनल

स्वरा का प्रज्ञा पर अटैक- आतंक की आरोपी बन जाती है सांसद, सवाल पूछने वाला एंटीनेशनल

ग्वालियर।अतुल सक्सेना

अपने बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में बनी रहने वाली फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर के बोल एक बार फिर बिगड़े हैं। ग्वालियर में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित “बिटिया उत्सव” में उन्होंने सांसद साध्वी प्रज्ञा पर तंज कसा और हिंदू मुसलमान को लेकर दिल्ली पुलिस को भी कठघरे में खड़ा किया । स्वरा के बयान पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है और स्वरा को अतिथि बनाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

मध्य प्रदेश सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने चार दिवसीय बिटिया उत्सव का आयोजन ग्वालियर में किया है। आयोजन में अतिथि के तौर पर फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर भी शामिल हुई । उन्होंने सरकारी मंच से एक महिला के खिलाफ ही टिप्पणी की। स्वरा ने साध्वी प्रज्ञा सिंह का नाम लिए बिना कहा कि हमने पिछले साल लोकसभा चुनाव में एक आतंक आरोपी को बड़े अंतर से जिताकर संसद पहुंचाया है क्या ये एंटी नेशनल नहीं है ? स्वरा यहीं नहीं रुकी अपनी आदत के मुताबिक उन्होंने हिंदू मुसलमान को लेकर भी यहाँ बात रखी। स्वरा ने दिल्ली पुलिस को कठघरे में खड़ा करते हैं कहा कि दिल्ली में दंगे हो रहे हैं और ऐसे में मैं यदि दिल्ली जाती हूँ तो मेरी आइडेंटिटी हिंदू होने के कारण पुलिस मुझ पर उतनी बर्बरता नहीं करेगी जितनी वो मुसलमानों पर कर रही है।

स्वरा के बयान के बाद भाजपा हमलावर हो गई है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने स्वरा भास्कर के बयान की निंदा करते हुए कहा कि भाजपा को ये कहते हुए दुख हो रहा है कि मप्र सरकार अपने अधिकारियों के माध्यम से देश द्रोह को बढ़ावा देने वाली ताकतों को प्रश्रय दे रही है। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए जिन्होंने सरकारी कार्यक्रम में स्वरा भास्कर को अतिथि बनाकर बुलाया है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews