आंशिक संशोधनों के साथ ग्वालियर में टोटल लॉक डाउन दो दिन बढ़ाया

आंशिक संशोधनों के साथ ग्वालियर में टोटल लॉक डाउन दो दिन बढ़ाया

ग्वालियर। 14 अप्रैल तक जारी लॉक डाउन और ग्वालियर जिले में पिछले चार दिन से जारी टोटल लॉक डाउन के बीच जिला प्रशासन ने आंशिक संशोधन के आदेश जारी किये हैं। जिला दंडाधिकारी एवं कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर अपर जिला दंडाधिकारी किशोर कान्याल ने आदेश जारी करते हैं बताया कि जिले में धारा 144 लागू है और एक अप्रैल से जारी टोटल लॉक डाउन की अवधि को दो दिनों के बढ़ा दिया है|

आदेश के मुताबिक किराने की थोक और खेरीज दुकानें सुबह 8:00 बजे से शाम को 4:00 बजे तक खुली रहेंगी। इसी तरह सभी पेट्रोल पंप सुबह 8:00 बजे से शाम को 4:00 बजे तक खुले रहेंगे। दूध की दुका, ब्रेड, टोस्ट व अन्य सामान की दुकान सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे तक खुलेंगी। प्रशासन ने शहर के सभी मेडिकल स्टोर्स, प्राइवेट क्लीनिक को सुबह 8:00 बजे से शाम को 4:00 बजे तक खोलने के निर्देश दिया हैं। लेकिन सब्जी मंडी पूरी तरह से बंद रहेंगी और फल मंडी में भी लॉक डाउन रहेगा। इसके अतिरिक्त टायर की दुकान , पंचर की दुकान सुबह 8:00 बजे से शाम को 4:00 बजे तक खुलेंगी । बैंक में लेनदेन 10:15 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक होगा। रसोई गैस की डिलीवरी निरंतर जारी रहेगी। कलेक्टर के मुताबिक ये आदेश दो दिन पांच और छह अप्रैल के लिए लागू रहेगा। जिला प्रशासन ने शहर के नागरिकों से अपील की है कि वे इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखें।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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